ग्रेटर नोएडा में फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर पुलिसकर्मियों को धमकाने वाली सदर बाजार क्षेत्र निवासी जोया खान एक बार फिर सुर्खियों में है। कभी बड़ी अधिकारी बनने की हसरत रखने वाली जोया सफल नहीं हो पाई तो फर्जीवाड़े की राह पर चल पड़ी। पुलिस अधिकारियों को धमकाने के मामले में अब वह पांचवीं बार जेल गई है।
जोया खान ने दो बार पीसीएस की परीक्षा दी थी, लेकिन इसमें सफल नहीं हो पाई। इसके बाद वह फर्जी आईपीएस, आईएफएस, आईएफएस या रॉ अधिकारी बनकर पुलिस अधिकारियों को धोखा देते हुए वीआईपी सुविधाएं हासिल करने लगी। अप्रैल 2019 में नोएडा पुलिस ने जोया खान को गिरफ्तार किया था। तब फर्जीवाड़ा सामने आने पर पुलिस अफसर भी हैरान रह गए थे। वह फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर एप के जरिए पुरुषों की आवाज में फोन पर बात करके वीआईपी सुविधाएं लेती थी।
मेरठ में 28 मार्च 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली थी। इससे पहले पांच दिन जोया खान फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर एस्कार्ट लेकर पूरे शहर में घूमी थी। तब उसके पास से फर्जी यूनाइटेड स्टेट डिपार्टमेंट का डिप्लोमेटिक पहचान पत्र, दो लैपटॉप, दो वॉकी-टॉकी वायरलेस सेट, चार एंड्रॉयड मोबाइल, एक पिस्टल नुमा लाइटर, एक गाड़ी एक्सयूवी महिंद्रा 500 नीली बत्ती लगी हुई, एक सिल्वर कलर की मर्सिडीज कार बरामद हुई थी।
एक गाड़ी पर अवैध रूप से नीली बत्ती और मर्सिडीज कार पर संयुक्त राष्ट्र संघ का स्टीकर लगा था। जोया ने कई बार जनपद गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, मेरठ आदि से खुद को संयुक्त सचिव भारत सरकार बनकर पुलिस एस्कॉर्ट व वीआईपी सुविधा ली थी। जब इसकी जांच की गई तो पाया गया कि उसने अपने पति निशांत उर्फ हर्ष प्रताप के साथ मिलकर यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल ऑर्गेनाइजेशन की फर्जी ईमेल आईडी बनाकर विभिन्न जनपदों के उच्चाधिकारियों को ईमेल किए थे। तब सिविल लाइन थाने में उसके खिलाफ पुलिस की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। यह केस सीजेएम कोर्ट में विचाराधीन है।
खुद को बताती थी सिक्योरिटी चीफ
वह फर्जी आईडी से खुद को सिक्योरिटी चीफ बताती थी। यह मैसेज जोया ने गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा, मुरादाबाद, गुरुग्राम और अलीगढ़ एसएसपी को भेजे थे। मैसेज जाते ही पुलिस अधिकारी जोया को एस्कार्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दे देते थे। नेट बैंकिंग के लिए भी जोया ने इसी ईमेल का इस्तेमाल किया था।
जोया खान के पिता डॉ. अय्यूब खान मेरठ में क्लीनिक चलाते हैं। अपने शौक पूरे करने और परिवार की समाज में साख बनाने के लिए उसने ये फर्जीवाड़े किए थे। गाड़ी पर नीली बत्ती लगाकर और खुद को बड़ा अधिकारी बताकर जोया खान ने आसपास के लोगों पर रुतबा जमा रखा था। उसके रौब के चलते पुलिस वाले भी वेस्ट एंड रोड तिवारी कंपाउंड स्थित कोठी पर जाकर जोया को सैल्यूट करते थे।
जोया खान सीधे थानेदार के सीयूजी नंबर पर कॉल करती थी। उन्हें हड़काकर पूछती थी कि एस्कॉर्ट कहां रह गई। थानेदार बोलते कि हमें तो कोई संदेश नहीं आया। तभी दो-तीन मिनट बाद कंट्रोल रूम से थानेदार के पास उसे एस्कॉर्ट मुहैया कराने के लिए कॉल आ जाती थी। वह एसएसपी की ई-मेल आईडी पर मैसेज भेजकर एस्कार्ट मांगती थी।
गुरुग्राम में ठगी करते पकड़ी गई थी
जोया खान को ग्रुरुग्राम में फर्जी आईपीएस बन रौब दिखाकर ठगी करते हुए एसटीएफ ने पकड़ा था। इसके बाद गुरुग्राम एसटीएफ ने उसके घर पर छापा मारा। जहां पर आईपीएस और आईएफएस अधिकारी की वर्दी और बैज के साथ आईकार्ड, कई दस्तावेज जब्त किए थे। इसके अलावा वहां से लाल एवं नीली बत्ती भी बरामद हुई थी।