जय किसान आंदोलन के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि गन्ना नियंत्रण आदेश 2026 किसानों की जगह शुगर इंडस्ट्रीज के हित में है। अगर यह आदेश लागू होता है तो गन्ना किसान पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे। उन्होंने ये बातें चौधरी चरण सिंह विवि के अर्थशास्त्र विभाग में आयोजित गोष्ठी के बाद पत्रकार वार्ता में कहीं।
उन्होंने कहा कि नया कानून बिना किसानों की सहमति और सुझाव के बिना लाया जा रहा है। जिसके लिए कानून है, उसे ही इसकी कोई जानकारी नहीं है। सरकार ने अभी तक किसी भी किसान संगठन को इस आदेश की प्रति तक नहीं दी है। सरकार को कानून लाने से पहले सभी किसानों से वार्ता करनी चाहिए। कम से कम देश के छह राज्यों में जाकर किसानों से वार्ता करें और उसके बाद उनके सुझाव लें। इसके बाद कानून पर विचार किया जाए।
यादव ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि इस मसौदे की प्रति किसी किसान संगठन को नहीं दी गई। इसमें प्रस्ताव दिया गया है कि गन्ना मिलों की दूरी 15 किमी से बढ़ाकर 25 किमी की जाएगी। अगर ऐसा हुआ तो मिल प्रबंधन का एकाधिकार हो जाएगा। इसके अलावा आदेश में खांडसारी उद्योगों पर कानूनी बंदिश लगाई जा रही है, उन्हें लाइसेंस लेना होगा। खांडसारी उद्योग वाले चाहें तो भी एफआरपी से अधिक पैसा किसानों को नहीं दे सकते। उन्हें तय पैसे ही किसानों को गन्ने के बदले देने होंगे जो मिलों के भाव से भी कम हैं।
उन्होंने कहा कि 60 साल बाद सरकार गन्ना नियंत्रण आदेश के बदल रही है तो किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखे। इसमें किसानों को 15 दिनों में भुगतान न होने पर ब्याज दिए जाने पर कोई चर्चा नहीं है। गन्ना नियंत्रण आदेश 2026 किसानों पर बिजली गिराने का काम करेगा। यह आदेश केवल मिलों के हितों में है। इसके लागू किए जाने से पहले देश के किसानों से वार्ता करनी चाहिए।