यह पहला मामला नहीं
यह पहला ऐसा मामला नहीं है। इससे पहले हैदराबाद की युवती और बिहार के युवक के शव के साथ भी ऐसा ही हुआ था। उनका भी कई दिन बाद यही अंतिम संस्कार करना पड़ा था।
दरअसल, कोरोना का कहर ऐसा है जिससे मरने वाले का आखिरी सफर भी पूरा करने में परिवार वालों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। एक तो अंतिम संस्कार में परिवार के चंद लोग ही शामिल हो पाते हैं, दूसरा शव को एक जिले से दूसरे जिले में ले जाने में भी तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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