दो साल की मासूम बेटी की गला घोंटकर नहर में फेंक कर हत्या करने वाले कातिल बाप सुलेमान को न्यायालय अपर जिला जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट नंबर- 01 आलोक द्विवेदी ने उम्रकैद और जुर्माने से दंडित किया है। बच्ची की मां ने ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।
अभियोजन के अनुसार, करीब दो साल पहले थाना सरधना क्षेत्र में ग्राम कमरुद्दीननगर मढ़ियाई से दो साल की मासूम इकरा गायब हो गई थी। उसका शव गंगनगर भोला झाल में गुमशुदगी दर्ज होने के चार दिन बाद पुलिस की तलाशी में मिला था।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ने न्यायालय में बताया कि गांव कमरुद्दीननगर मढ़ियाई के रहने वाले सुलेमान की दो साल की बेटी इकरा 15 जून 2024 को गायब हो गई थी। सूचना मिलने पर पुलिस द्वारा इकरा की तलाश की गई। 18 जून 2024 को भोला झाल पर इकरा का शव मिला। इसके बाद सुलेमान की पत्नी मोहसिना ने ही पुलिस से अपने पति के खिलाफ बेटी की हत्या करने के संबंध में शिकायत की।
मोहसिना ने न्यायालय में अपना बयान दर्ज कराया कि उसकी तीन लड़कियां और एक लड़का है। इकरा सबसे छोटी थी। उसकी दो बेटियों की पहले मृत्यु हो चुकी है। उन दोनों पर ऊपरी हवा होने की बात कहते हुए उसके पति सुलेमान ने इलाज नहीं कराया था। उसने बताया कि उसका पति बेटियों को बिल्कुल पसंद नहीं करता था, जिसके चलते वह घटना के दिन उसकी बेटी इकरा को अपने साथ ले गया था।
इकरा को साथ ले जाते हुए रास्ते में लगे हुए सीसीटीवी कैमरे में भी रिकॉर्डिंग हुई थी जिन्हें पुलिस द्वारा अपनी सुपुर्दगी में ले लिया गया था। मेडिकल रिपोर्ट में पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. अनुराग कुमार ने बताया कि इकरा की मौत गला घोंटकर पानी में डूब कर हुई है। इकरा की पहचान उसके पहने हुए कपड़ों से भी की गई थी।
न्यायालय में एडीजीसी ने बच्ची की मां सहित सात गवाह पेश किए। वहीं आरोपी पक्ष की ओर से न्यायालय में कहा गया कि इस हत्या की घटना का कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं है, घटना में जो भी साक्षी पेश किए गए हैं वह सभी परिस्थितिजन्य साक्षी हैं।
न्यायालय ने शुक्रवार को अपने निर्णय में कहा कि अभियुक्त ने अपनी बेटी की हत्या की है और शव को छुपाने के लिए नहर में फेंकने के बाद उसे तब तक देखता रहा जब तक कि वह पानी में डूब नहीं गई। न्यायालय ने हत्यारे पिता सुलेमान को बेटी इकरा की हत्या करने और साक्ष्य छुपाने का दोषी पाते हुए उम्रकैद और 10 हजार रुपये के अर्थ दंड से दंडित किया है। शव छुपाए जाने के दोष में 3 वर्ष के कारावास और 5000 रुपये की जुर्माने से दंडित किया है।
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