दिवोल्का अपने माता-पिता की लाड़ली थी। प्रदीप और उनकी पत्नी रुबी आज भी दिवोल्का का नाम आते ही फफकने लगते हैं। कहते हैं कि वे जिंदगी भर बेटी के जाने का गम नहीं भूल सकते। बस अब तो बेटी को इंसाफ मिल जाए, यही आस लगाकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। हत्यारोपी को फांसी की सजा होनी की आस लगाए हैं।
जिला जज की कोर्ट में विचाराधीन
सीनियर अधिवक्ता प्रमोद त्यागी ने बताया कि पुलिस ने 31 दिसंबर 2014 को चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। 4 मार्च 2016 को चार्ज बना। केस में अब वादी और मुख्य गवाह प्रदीप यादव की गवाही हुई है। लेकिन फोरेंसिक की रिपोर्ट न आने के चलते गवाही रुकी हुई है। अदालत कई बार पुलिस को आदेश कर चुकी है कि फोरेंसिक की रिपोर्ट आगरा से मांगाकर कोर्ट में प्रस्तुत करे, ताकि सुनवाई और गवाही आगे चल सके। वहीं, सावन, राजीव और वेदप्रकाश जेल से जमानत पर बाहर हैं।
ये भेजे थे नमूने
पुलिस ने आगरा की फोरेंसिक लैब में जांच के लिए दिवोल्का और आरोपी सावन के कपड़े, जिस रस्सी से गला घोटा था, आरोपी के फिंगर प्रिंट समेत आठ ऐसे ठोस सुबूत भेजे थे, जिनका मिलान होना बेहद जरूरी है। पुलिस ने रिपोर्ट तो भेज दी। लेकिन उसको लेने के लिए सिर्फ एक बार आगरा गई। इसको लेकर पीड़ित परिवार में आक्रोश है।
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