योगेश वर्मा, पूर्व सपा विधायक
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स्थानीय राजनीतिक गलियारों में इस सीट से जिन प्रमुख चेहरों के नाम चर्चा में हैं और जो टिकट के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं आदिल चौधरी। आदिल के सपा के महानगर अध्यक्ष हैं और दो बार इस सीट पर चुनाव लड़ चुके हैं। दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा है।
हालांकि पिछली बार उन्होंने भाजपा के सोमेंद्र तोमर को कड़ी टक्कर दी थी। वह महज 7942 वोटों से हारे थे। उन्हें 1,21,725 वोट मिले थे। इनके अलावा सपा जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी, डॉ. किशन पाल गुर्जर, मुखिया गुर्जर और जितेंद्र गुर्जर के नाम शामिल हैं।
अगर पूर्व विधायक योगेश वर्मा का हस्तिनापुर से टिकट नहीं होता है तो वह भी इस सीट के मजबूत दावेदार हैं। वहीं, कांग्रेस से सपा का गठबंधन तय माना जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस भी इस सीट पर टिकट के लिए जोर लगा सकती है। हाल ही में सेंट्रल मार्केट में पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना देखे गए थे। उन्हें इसी परिपेक्ष्य में जोड़कर देखा जा रहा है।
आदिल चौधरी, सपा मुखिया अखिलेश यादव
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कौन मार सकता है बाजी और क्यों
सपा के इस सियासी समर में बाजी कौन मारेगा, इसे लेकर पार्टी गलियारों में कयासों का बाजार गर्म है। जानकारों का मानना है कि इस बार बाजी वही मारेगा जो कई पैमानों पर खरा उतरेगा। जैसे- मजबूत जातीय समीकरण। इस सीट पर मुस्लिम और दलित मतदाताओं के साथ-साथ अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) का समीकरण चुनावी हार-जीत तय करने में अहम भूमिका निभाता है।
जो उम्मीदवार सभी वर्गों को साधने में सक्षम होगा, उसका पलड़ा भारी रहेगा। ऐसे में आदिल चौधरी और योगेश वर्मा का दावा मजबूत लग रहा है। टिकट के लिए संगठन की स्वीकार्यता भी जरूरी है। जो चेहरा विवादों से दूर रहा हो सबसे ज्यादा होगी, हाईकमान उस पर भरोसा जता सकता है।