स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल
चार नेशनल स्पर्धाओं में भी स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किए। लेकिन रुबीना 50 मीटर .22 राइफल के मंहगे खेल ने परिवार की चिंता बढ़ा दी। एनसीसी में रहते हुए वो राइफल से निशाना साधती रही। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण रुबीना ने नौकरी करने का मन बनाया। 2017 में खेल कोटे से रुबीना का चयन बीएसएफ में हो गया। वो वर्तमान में इंदौर में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं। लेकिन आज भी रुबीना के पास अपनी राइफल नहीं है। बीएसएफ की ओर से खेलते हुए विभाग की राइफल मिल जाती है, लेकिन ओपन शूटिंग प्रतियोगिता के लिए रुबीना प्रतिभाग नहीं करती हैं। रुबीना के पिता हाजी गफ्फार सैफी ने बताया ओपन शूटिंग प्रतियोगिता के लिये 40 से 50 हजार रुपये में राइफल किराए पर मिलती है। जबकि उनका बजट इतना नहीं होता।
पिता के अनुसार .22 राइफल की कीमत 10 से 12 लाख रुपये है। लखनऊ में आयोजित 41वीं उप्र शूटिंग चैंपियनशिप में रुबीना ने गोल्ड मेडल जीता। जिसमें 1200 में से 1161 अंक प्राप्त कर खुद को साबित किया। लखनऊ में बीएसएफ की राइफल से निशाना साधते हुए रुबीना ने यह कारनामा किया।
सरकार से लगाई मदद की गुहार
पिता हाजी गफ्फार सैफी ने प्रदेश व केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई है। खुद की राइफल न होने से रुबीना कामनवेल्थ सहित कई खेलों में शामिल नहीं हो सकी। ओपन प्रतियोगिताओं में शामिल होने से रुबीना भविष्य में आगे बढ़ेगी। पिता का कहना है सरकार को रुबीना के लिये मदद करनी चाहिए।
कर रही हैं ग्रेजुएशन
बीएसएफ में खेलों का प्रतिनिधित्व करने वाली रुबीना सैफी मवाना के कृषक कॉलेज से बीए की पढ़ाई भी कर रही हैं। वो बीए अंतिम वर्ष में हैं। पिता ने बताया कि कॉलेज स्टॉफ रुबीना की पढ़ाई में काफी मदद करता है। यही कारण है खेलों के साथ उसकी पढ़ाई जारी है।
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