नोएडा के फर्नीचर कारोबारी शाहिद चौधरी ने अवैध रूप से हिरासत में लेकर प्रताड़ित करने, रुपये वसूलने का आरोप लगाया है। लिसाड़ी गेट थाने के दरोगा अंकित सागर और हेड कांस्टेबल नीरज कुमार को निलंबित कर दिया गया। वहीं मुजफ्फरनगर के पमनावली चौकी प्रभारी आरिफ अली पर भी गाज गिरी है।
बैंक खाते अनफ्रीज कराने के नाम पर फर्नीचर कारोबारी शाहिद चौधरी से वसूली के मामले में मेरठ और मुजफ्फरनगर के तीन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई है। मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने के दरोगा अंकित सागर और हेड कांस्टेबल नीरज कुमार को एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने निलंबित कर दिया है। वहीं, मुजफ्फरनगर के खतौली थाने की पमनावली चौकी प्रभारी दरोगा आरिफ अली को भी कारोबारी की पत्नी का बैंक खाता अनफ्रीज कराने के बदले एक लाख रुपये लेने और शेष रकम के लिए दबाव बनाने के आरोप में निलंबित किया गया है।
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नोएडा के गेझा, सेक्टर-93 निवासी शाहिद चौधरी ने आरोप लगाया है कि लिसाड़ी गेट थाने में उन्हें हिरासत में रखकर प्रताड़ित किया गया और आठ लाख रुपये मांगे गए। उन्होंने करीब 4.72 लाख रुपये की वसूली की शिकायत की है। वहीं पमनावली चौकी प्रभारी दरोगा आरिफ अली पर एक लाख रुपये अलग से वसूलने का आरोप लगाया है। शिकायत में थाने के पास साइबर कैफे चलाने वाले शादाब राव की भूमिका भी सामने आई है।
डीआईजी कलानिधि नैथानी के निर्देश पर मामले की जांच की जा रही है। मेरठ में जांच सीओ साइबर क्राइम सौम्या अस्थाना को सौंपी गई है, जबकि लिसाड़ी गेट प्रकरण की शुरुआती जांच में लापरवाही पर सीओ कोतवाली संग्राम सिंह को अंतिम चेतावनी दी गई है।
लिसाड़ी गेट थाने में हिरासत में रखकर प्रताड़ित करने का आरोप
शाहिद चौधरी सोफा और फर्नीचर का कारोबार करते हैं। शाहिद के मुताबिक उनकी पत्नी बैंक खाता फ्रीज हो गया था। इसे अनफ्रीज कराने के लिए वह मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने पहुंचे थे। उनका आरोप है कि वहां पुलिसकर्मियों ने उनके साथ गलत व्यवहार किया और जबरन हवालात में बंद कर दिया।
शाहिद ने शिकायत में कहा कि इस दौरान उनका आईफोन, घड़ी और बेल्ट भी अपने कब्जे में ले लिए गए। उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उनके और उनके भाई सनवर के खिलाफ कार्रवाई करने की धमकी दी गई और छोड़ने के बदले कुछ सादे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए।
शिकायत के अनुसार, उनका मोबाइल हेड कांस्टेबल नीरज कुमार और थाने की साइबर डेस्क के प्रभारी दरोगा अंकित सागर ने लिया था। शाहिद का आरोप है कि उनसे आठ लाख रुपये मांगे गए और चार लाख रुपये देने के बाद 4 अगस्त 2026 को उन्हें छोड़ दिया गया। हालांकि, उनकी घड़ी और बेल्ट वापस नहीं की गईं।
यहां से शुरू हुआ था मामला
मेरठ के मवाना निवासी शादाब राव ने पुलिस को बताया कि उसके भाई दानिश का नोएडा के फर्नीचर कारोबारी शाहिद से लेनदेन था और शाहिद उसकी रकम नहीं दे रहे थे। इसके बाद शादाब ने लिसाड़ी गेट थाने में तैनात दरोगा अंकित सागर और हेड कांस्टेबल नीरज कुमार से संपर्क किया था। आरोप है कि इसी जानकारी के आधार पर शाहिद का बैंक खाता फ्रीज कराया गया और उन्हें मेरठ बुलाया गया। अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि दानिश और सत्तार की शिकायतों पर बैंक खाते फ्रीज कराने का क्या आधार था और क्या इन शिकायतों का इस्तेमाल कारोबारी पर दबाव बनाने के लिए किया गया।
बैंक ट्रांसफर और नकद भुगतान के जरिए रकम लेने का आरोप
शाहिद ने करीब 4.72 लाख रुपये की अवैध वसूली किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक, 4 अगस्त 2026 को उनके बैंक खाते से 1.20 लाख रुपये का लेनदेन हुआ। इसके अलावा 2.80 लाख रुपये नकद शादाब राव को लिसाड़ी गेट थाने के कार्यालय में दिए जाने का आरोप है।
शिकायत में कहा गया है कि थाने के पास साइबर कैफे चलाने वाला शादाब राव, हेड कांस्टेबल नीरज कुमार और दरोगा अंकित सागर के कहने पर उनसे रकम मांग रहा था। 5 अगस्त 2026 को शादाब राव ने मोबाइल फोन से उनकी बात दोनों पुलिसकर्मियों से कराई। इसके बाद मोहम्मद इमरान और सुशीला के बैंक खातों में 36-36 हजार रुपये ऑनलाइन भेजने के लिए कहा गया।
आरोप है कि यह रकम अधिकारियों को सोफा सेट देने के नाम पर मांगी गई थी। शाहिद ने भुगतान रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज शिकायत के साथ दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जांच में शादाब राव की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि अंकित सागर और नीरज कुमार ने उसे थाने में निजी तौर पर रखा हुआ था और वह कथित वसूली में भूमिका निभाता था। इस पहलू की जांच एसपी सिटी कर रहे हैं।
पत्नी का खाता अनफ्रीज के नाम पर एक लाख रुपये लेने का आरोप
मुजफ्फरनगर के खतौली क्षेत्र में पमनावली चौकी प्रभारी आरिफ अली पर भी शाहिद चौधरी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, उनकी पत्नी का बैंक खाता धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए जाने की बात कहकर फ्रीज कर दिया गया था। इसे अनफ्रीज कराने के बदले मुजफ्फरनगर और मेरठ के पुलिसकर्मियों ने अलग-अलग मामलों में रकम मांगी।
शाहिद का आरोप है कि दरोगा आरिफ अली ने उनकी पत्नी के बैंक खाते के फ्रीज होने का हवाला देकर धनराशि मांगी। दबाव बनाकर उनके भाई से एक लाख रुपये वसूल लिए गए। रकम लेने के बाद भी शेष धनराशि देने के लिए लगातार दबाव बनाया गया।
शाहिद ने एक लाख रुपये दिए जाने से संबंधित वीडियो साक्ष्य मौजूद होने का दावा भी किया है। शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू हुई। मुजफ्फरनगर के एसएसपी सूरज राय ने बताया कि आरोपों से घिरे पमनावली चौकी प्रभारी आरिफ अली को निलंबित कर दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है।
बिना पीड़ित से बात किए जांच पूरी करने पर सीओ को चेतावनी
डीआईजी कलानिधि नैथानी ने शिकायत मिलने के बाद एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति को मामले की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। डीआईजी के मुताबिक, सीओ कोतवाली संग्राम सिंह ने शुरुआती जांच में गंभीरता नहीं दिखाई और पीड़ित से बात किए बिना ही जांच पूरी कर दी। इस पर डीआईजी ने नाराजगी जताते हुए सीओ से जवाब तलब किया और अंतिम चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि आगे कोई गलती पाई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीआईजी ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में संलिप्त पुलिसकर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा और सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई की जाएगी।