दो अप्रैल 2018 को मेरठ में हुआ बवाल नेशनल केस स्टडी बन गया। बुधवार को रैपिड एक्शन फोर्स एकेडमी ऑफ पब्लिक ऑर्डर (रैपो) मेरठ में म्यांमार के पुलिस अधिकारियों को अलग अलग देशों की सात घटनाओं को पढ़ाया गया। बवाल के वीडियो प्राजेक्टर पर दिखाए गए। इनमें मेरठ का बवाल, जम्मू कश्मीर की हिंसा, दक्षिण अफ्रीका, पुर्तगाल की वीडियो अहम रही। रैपो देशभर का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र है, जहां दंगा नियंत्रण प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाता है।
एकेडमी में 17 से 24 दिसंबर तक म्यांमार के सात पुलिस अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण चल रहा है। बुधवार को मेरठ में तैनात आईपीएस अविनाश पांडेय, आरएएफ के असिस्टेंट कमांडेंट गौरव कुमार, कौशल चौधरी और सोनिया ने विदेशी मेहमानों को अलग अलग विषयों पर प्रशिक्षण दिया। अंतरराष्ट्रीय केस स्टडी में बताया गया कि भीड़ जब भी जुटती है तो उसके इरादों को भांपना जरूरी है। कई बार स्थानीय पुलिस भीड़ की मंशा नहीं समझ पाती। ऐसे में जब भीड़ हिंसक हो जाती है तो दंगा नियंत्रण प्रबंधन लागू किया जाता है। किसी भी हालात में भीड़ पर पहले गोली नहीं चलाई जाती, उसे तितर बितर करना पड़ता है। इसमें अलग अलग प्रकार के प्रशिक्षण की जरूरत होती है। अलग अलग लेक्चर में भीड़ मनोविज्ञान, पुलिस-पब्लिक व्यवहार, सांप्रदायिक प्रभाव, दंगा विरोधी ड्रिल के बारे में भी प्रशिक्षण दिया गया।
यह थी दो अप्रैल 2018 की घटना
दो अप्रैल 2018 के दिन सुबह नौ बजे का वक्त था। एससी/एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर एक जाति के लोगों को जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन देना था। सोशल मीडिया पर भारत बंद का मेसेज वायरल हो रहा था। इसी दौरान एनएच-58 स्थित कंकरखेड़ा पुलिस स्टेशन की शोभापुर पुलिस चौकी पर लाठी डंडों से लैस करीब 800 लोग पहुंचते हैं। पुलिस के एक्शन लेने से पहले भीड़ दरोगा व सिपाहियों को चौकी में बंद कर आग लगा देती है। किसी तरह पुलिसकर्मियों ने जान बचाई। सूचना पर डीएम और एसएसपी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आरएएफ को बुलाया। उससे पहले हाईवे पर बसों में आग लगा दी गई। इसके बाद आरएएफ की एक कंपनी ने शोभापुर और हाईवे पर मोर्चा संभाला। आरएएफ ने हाईवे पर दंगा नियंत्रण वाहन, वाटर कैनन और वज्र वाहनों का प्रयोग किया। इस बीच भीड़ ने कचहरी स्थित चौक पर आगजनी कर दी। एक युवक भीड़ द्वारा चलाई गई गोली से मारा गया। इसके बाद पूरे शहर को आरएएफ के हवाले कर दिया गया।