राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों के पुराने ट्रैक्टर तो प्रदूषण के कारण रोके जा रहे हैं लेकिन सरकार के ही ट्रक दिन रात शहर में आ जा रहे हैं। जो भी ट्रक अब मुजफ्फरनगर या अन्य शहर में आएगा, तो उसे वापस नहीं जाने दिया जाएगा। मेरठ मुजफ्फरनगर समेत कई जिलों में फैक्टरी में ट्रक आते हैं।
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उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो लखनऊ में आंदोलन होगा। इससे पहले मुख्यमंत्री से वार्ता की जाएगी, अगर बात नहीं सुनी गई तो लखनऊ में ही आंदोलन होगा। इसके साथ ही अरनावली के पहाड़ बचाने के लिए भी आंदोलन किया जाएगा।
ये हैं किसानों की मुख्य मांगें
1. भाड़ा जो कि बिना किसी तर्क के 35% बढ़ाया गया है, उसे घटाया जाए।
2. हाड़ा जो घटाया गया, उसे पिछले पेराई सत्र के अनुसार किया जाए।
3. अस्वीकृत गन्ना प्रजाति के मूल्य पूर्व वर्षों की भांति बढ़ाए जाए।
4. अस्वीकृत प्रजाति की खरीद भी संतुलन बनाकर अगेती और सामान्य के साथ की जाए।
5. गन्ना तौल केंद्र जिस हवाई दूरी के मानक से बनाए जाते हैं, उसी हवाई दूरी से भाड़ा लिया जाए।
6. बाहरी पड़ोसी राज्यों में उत्पन्न गन्ना प्रजाति को प्रदेश में भी स्वीकृत किया जाए।
7. रियल टाइम खतौनी में हो रही गड़बड़ी को सही कराने में लेखपाल कानूनगो के भ्रष्टाचार को खत्म कराया जाए, पूर्व की भांति प्रार्थना पत्र से अंश निर्धारण कराया जाएं।
8. अन्य तहसीलों में किसान के काम पेंडिंग हैं। डोल बंदी, नामांतरण आदि मामले तत्काल एक समय सीमा का निर्धारण करके निस्तारित कराए जाएं।