मेरे बेटे का क्या कसूर था, वह तो अभी बच्चा था। डंडे से पीट लेते, जान तो नहीं जाती, मैं खुद इलाज करा लेती। अब तो मेरा बेटा लौट कर नहीं आएगा। कार में चाकू कौन रखता है, हत्यारों को कोई तो सजा दिला दो। देर रात अहमदाबाद से प्रियांशु का शव पल्लवपुरम पहुंचा तो मां रीनू जैन, बहन गीतिका जैन, पिता पंकज बिलख उठे।
घर पर सांत्वना देने आई महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
मां रीनू ने रोते हुए कहा कि दीपावली पर बेटा परिवार के साथ त्योहार मनाने आया था। दो नवंबर को वापस लौट गया। दिसंबर में आने को बोला था। रात में सूट लेने जा रहा था, जब उसकी हत्या की गई। बहन गीतिका ने बताया कि उसका भाई बहादुर था। आरोपी ने पीछे से वार किया। पढ़ने, खेल, डांस सभी में प्रियांशु अच्छा था। कभी उसकी कोई शिकायत नहीं मिली। टेस्ट पास करने के बाद ही उसका दाखिला हुआ था।
प्रियांशु का ये घर अब सदा के लिए सूना हो गया।
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प्रियांशु का शव सुबह तीन बजे मोदीपुरम पहुंचा तो चीख पुकार मच गई। रात भर उसकी मां अपने बेटे को देखने के लिए इंतजार करती रही और रोती रही। जब उसकी डेड बॉडी घर पहुंची, तो लिपटकर खूब रोई। यह देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। प्रियांशु घर का इकलौता बेटा था। पिता पंकज की आंखों से आंसू नहीं थम रहे थे।
सूरजकुंड पर अंतिम संस्कार
अहमदाबाद से रात तीन बजे परिजन शव लेकर पल्लवपुरम पहुंचे। शव पहुंचते ही कॉलोनी में मातम पसर गया। मंगलवार को सूरजकुंड पर शव का अंतिम संस्कार किया गया।