यह है विसरा
जिला अस्पताल के डॉ. आरके गुप्ता के मुताबिक पोस्टमार्टम करने के दौरान शव के विसरल पार्ट यानी किडनी, लीवर, दिल, पेट के अंगों का सैंपल लिया जाता है, इसे विसरा कहते हैं। इनको जांच के लिए केमिकल एक्जामिनर के पास भेजा जाता है। मौत का कारण, मौत का समय, किस पार्ट के फेल होने से मौत हुई आदि सवालों के जवाब विसरा रिपोर्ट आने के बाद पुलिस को मिल जाते हैं।
80 फीसदी मामलों में मौत का कारण स्पष्ट नहीं
टीपीनगर स्थित रघुकुल विहार में अरोड़ा फैमिली के पांच सदस्यों की मौत हुई थी। एक शव बेड पर मिला, जबकि चार शव छत पर बने लोहे के जाल से रस्सी से लटके मिले थे। लालकुर्ती में नेहा नाम की युवती और उसकी मां सुमनलता की हत्या हुई थी।
शास्त्रीनगर में व्यापारी उसकी पत्नी, बेटी की संदिग्ध हालत में मौत हुई थी तो शास्त्रीनगर में किराना व्यापारी मोहित मदान की भी संदिग्ध हालत में मौत हुई थी। इनके समेत 80 फीसदी मामले ऐसे हैं, जिनमें मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ।
चार्जशीट लगती, कार्रवाई अधूरी
सीनियर अधिवक्ता अमित दीक्षित का कहना है कि विसरा रिपोर्ट आने से पहले ही पुलिस चार्जशीट लगाकर कोर्ट में दाखिल कर देती है। लेकिन पुलिस की कार्रवाई अधूरी रह जाती है। कोर्ट बार-बार पुलिस को नोटिस देती है कि विसरा रिपोर्ट दाखिल करो। उसके बाद पुलिस फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) को रिमाइंडर भेजती है। चर्चित और संगीन मामले में या उच्चस्तर पर दबाव पड़ने पर पुलिस एफएसएल से रिपोर्ट मंगाती है।
| थाना |
विसरा |
रिपोर्ट |
थाना |
विसरा |
रिपोर्ट |
| सिविल लाइन |
20 |
04 |
रोहटा |
12 |
02 |
| मेडिकल |
35 |
08 |
जानी |
30 |
04 |
| नौचंदी |
18 |
05 |
दौराला |
35 |
08 |
| कोतवाली |
28 |
08 |
कंकरखेड़ा |
30 |
08 |
| देहलीगेट |
15 |
03 |
पल्लवपुरम |
12 |
03 |
| लिसाड़ीगेट |
35 |
05 |
मवाना |
28 |
07 |
| सदर बाजार |
12 |
03 |
हस्तिनापुर |
18 |
03 |
| लालकुर्ती |
11 |
02 |
फलावदा |
09 |
02 |
| रेलवे रोड |
08 |
01 |
बहसूमा |
10 |
03 |
| ब्रह्मपुरी |
19 |
05 |
गंगानगर |
09 |
02 |
| टीपीनगर |
24 |
06 |
परीक्षितगढ़ |
15 |
02 |
| परतापुर |
26 |
05 |
भावनपुर |
23 |
05 |
| सरधना |
24 |
06 |
किठौर |
28 |
05 |
| खरखौदा |
19 |
03 |
मुंडाली |
11 |
03 |
| सरूरपुर |
16 |
04 |
|
|
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चार्जशीट के साथ लगाएं विसरा रिपोर्ट
निवाड़ी (गाजियाबाद) में फोरेंसिक साइंस लैब बन गई है। इससे काफी फायदा हुआ है। मेरठ रेंज के कप्तानों को निर्देश हैं कि चार्जशीट के साथ विसरा रिपोर्ट लगाई जाए, ताकि मुल्जिम को उसके जुर्म की सजा मिल सके। -आलोक सिंह, आईजी मेरठ रेंज
विसरा रिपोर्ट महत्वपूर्ण
किसी भी मुकदमे में मुल्जिम को सजा दिलाने के लिये पुख्ता सुबूत होने चाहिए। विसरा रिपोर्ट बहुत महत्वपूर्ण है। डीजीपी रहते समय मंडल स्तर पर फोरेंसिक लैब खोलने की सिफारिश की थी। हर जिले में फोरेंसिक टीम होनी चाहिए। -अरविंद जैन, पूर्व डीजीपी, उत्तर प्रदेश