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ISI ने वेस्ट यूपी में फैलाया बड़ा नेटवर्क, सामने आया चौंकाने वाला खुलासा, यहां बिकते हैं हथियार

Fri, 04 Jan 2019 03:26 PM IST
कपिल kapil गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई असलहा तस्करों के सहारे वेस्ट यूपी में नापाक मंसूबों को अंजाम देने की फिराक में है। ऐसे सप्लायरों के सहारे ही जाल को मजबूत किया जा रहा है। इनमें से कुछ सप्लायर आईएसआई के लिए स्पीलिंग मॉड्यूल की तरह काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) के इनपुट मिलने पर पुलिस भी एक्टिव हो गई है। पुलिस की हिरासत में नईम ने पूछताछ में भी इसको लेकर कई सनसनीखेज राज खोले हैं। पुलिस अधिकारी कहते हैं कि 30 साल पहले भी आईएसआई ने हथियार सप्लायरों के जरिये ही वेस्ट में जड़ें फैलाई थीं। अब भी उसी तरह नेटवर्क फैलाया जा रहा है।

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फिर वही आईएसआई का दशकों पुराना तरीका
साल 1990 में आईएसआई ने अवैध हथियार, नकली करेंसी को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर समेत कई जिलों में अपनी जडे़ं फैलाई थीं। इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा निवासी कैराना साल 1992 में हथियारों की खेप के साथ पकड़े गए थे। जिनके पाकिस्तान की आईएसआई से संपर्क थे। शिकंजा कसते ही दोनों साल 1995 में भारत छोड़कर पाकिस्तान भाग गए थे। इसके अलावा भी कई हथियार सप्लायरों के जरिये आईएसआई ने जडे़ं फैलाईं। ठीक इसी तरह से आईएसआई अब फिर से वेस्ट में हथियार सप्लायरों को मोहरा बना रहे हैं।

आईएस और आईएसआई से संपर्क बताया
26 दिसबंर 2018 को एनआईए ने हापुड़, मेरठ और अमरोहा समेत 17 जनपदों में आईएस व आईएसआई एजेंटों से जुड़े संदिग्धों की तलाश में छापेमारी की थी। जिसमें हापुड़ व मेरठ में एनआईए ने हथियार सप्लायर तलाशे। जिनके संपर्क आईएस और आईएसआई से जुड़े होने बताए थे। इससे पहले भी एनआईए लुधियाना में आरएसएस नेता रविंदर गोसाई की हत्या के मामले में वेस्ट यूपी के सप्लायरों से हथियार खरीदने की बात कही थी। इसको लेकर मेरठ समेत कई जनपदों में छापेमारी की थी। आरएसएस नेता की हत्या में आईएसआई का भी कनेक्शन निकला था। इससे पहले भी सुरक्षा एजेंसियां इनपुट दे चुकी है। 

आईएसआई भी जानती है राधना में बिकते हथियार
नईम से पूछताछ से स्पष्ट हुआ कि आईएसआई भी जानती है कि राधना में अवैध हथियार बिकते हैं। इसको लेकर आईएसआई एजेंट ने पहले नईम के रिश्तेदार साकिब से संपर्क किया और फिर राधना गांव में पहुंच गई। आईएसआई को क्या-क्या जानकारी है और वह किस-किस के संपर्क में है। इसकी जानकारी जुटाने के लिए एनआईए और सुरक्षा एजेंसियां साकिब व नईम का आमना सामना भी करा सकती हैं। एनआईए की पूछताछ में कई और राज खुल सकते हैं। वहीं, अवैध हथियार बनाने के नाम से गांव पहले से बदनाम है। कई नेताओं के संरक्षण में हथियार बनाने और सप्लाई करने वाले पुलिस की कार्रवाई से बच जाते थे।
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सप्लायर बच जाते हैं हर बार
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जोन में एक साल में दस हजार से ज्यादा हथियार बरामद किए गए। तमंचे और पिस्टल फैक्ट्री पकड़ी गईं। असलाह कारीगरों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज देती है। लेकिन सरगना या फिर सप्लायर पुलिस से साठगांठ कर बच जाते हैं। इसलिए पुलिस हथियार सप्लायरों का नेटवर्क तोड़ने में कामयाब नहीं हुई। इसको लेकर कई बार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल भी उठे हैं। हथियार सप्लायरों का नेटवर्क पुलिस के लिए भी चुनौती बन गया है। आईएसआई से कनेक्शन के बाद तो यह और भी खतरनाक हो गया है। 

लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त
अवैध हथियार सप्लाई होना खतरनाक है। असलाह कारीगर और सप्लायरों की गिरफ्तारी के जोन पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं। सप्लायरों की जडे़ं कहां तक फैली हैं, पुलिस तलाश करे। लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। - प्रशांत कुमार, एडीजी मेरठ जोन

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