सरूरपुर थाना क्षेत्र के कस्बा खिवाई से हिरासत में लिए गए महकार को रविवार सुबह एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की टीम पूछताछ के बाद छोड़ गई। जांच टीम ने सख्त हिदायत देते हुए जांच पूरी होने तक महकार पर जनपद से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगाया है। जांच के लिए उसे बुलाने पर एनआईए के सामने पेश होना पड़ेगा।
खिवाई कस्बे की बड़ी मस्जिद में महकार मोअज्जिन है। शनिवार सुबह करीब चार बजे एनआईए की टीम महकार के घर पहुंची थी। यहां इमरान व बाबू से उनके भाई महकार के बारे में पूछा। इसके बाद टीम महकार को हिरासत में लेकर उसके घर आ गई थी। एनआईए ने महकार के घर के तीनों कमरों की तलाशी ली और कुछ दस्तावेज कब्जे में लिए।
इसके बाद कस्बे के ही फैजान और मुस्तफा से पूछताछ की। करीब चार घंटे की पूछताछ के बाद महकार को टीम साथ ले गई। इस पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी की गई। दिल्ली में पूछताछ के बाद रविवार सुबह महकार को छोड़ दिया गया। एजेंसी ने जांच और पूछताछ को गोपनीय रखा है।
पाकिस्तान की बुआ और दिल्ली दंगों के बारे में की पूछताछ
बताया जा रहा है कि महकार से जांच टीम ने विभिन्न बिंदुओं पर पूछताछ की। महकार से दिल्ली दंगों और पाकिस्तान में रहने वाली उसकी बुआ के बारे में पूछताछ की। यह भी पूछा कि मस्जिद में कहीं बाहर से फंडिंग तो नहीं आती। महकार के पिता जमशेद दो भाई और दो बहन थे। महकार की एक बुआ कल्लो की शादी करीब 48 वर्ष पूर्व पाकिस्तान में हुई थी। दूसरी बुआ की शादी मुजफ्फरनगर के छतेला गांव में हुई थी। महकार की मां आशिया ने बताया कि शादी के बाद से उनकी ननद कल्लो कभी कस्बा खिवाई में नहीं आई है। कभी फोन से भी कोई संपर्क नहीं था। जांच में एनआईए की टीम ने पाकिस्तान में महकार की बुआ कल्लो के बारे में जानकारी की।
उपहार देने वाले संदिग्ध को साथ लाई थी टीम
खिवाई पहुंचने पर महकार ने बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व उसने मोबाइल खरीदा था। मोबाइल में उसने बस एक दो बार लूडो गेम खेला था। कभी किसी से सोशल मीडिया पर कोई बात भी नहीं की। करीब 15 दिन पूर्व मस्जिद में उससे एक व्यक्ति मिलने आया था। उसने खुद को दिल्ली दंगों का पीड़ित बताया था। उसने महकार से मदद मांगी थी। महकार ने कुछ मदद नहीं की तो दिल्ली में खुद की कपड़े की दुकान बताते हुए उपहार के रूप में कपड़े, रूमाल, टोपी दी थी। एनआईए जांच के दौरान अपने साथ इस संदिग्ध व्यक्ति को साथ लाई थी।