दादा और नाना भी थे नामी शिकारी
सैयद अली बिन हादी ने बताया उनके दादा ब्रिटिश काल में शिकार करते थे। 1952 में दादा स्व. सैय्यद इख्तदार हुसैन ने 18 फुट लंबे मगरमच्छ को मारा था। मगरमच्छ के पेट में सोने-चांदी के आभूषणों के साथ इंसानों की खोपड़ियां भी मिली थीं। उनके नाना ने भी रिकॉर्ड 68 गुलदार और 32 टाइगर का शिकार किया था।
पौढ़ी में हो सकता है अगला ऑपरेशन
अली ने बताया आदमखोर गुलदार या अन्य जानवर को पहचानना बड़ी चुनौती है लेकिन वह जानवर के हाव-भाव देखकर उसकी पहचान करते हैं। आदमखोर जानवरों को पिंजरे लगाकर और इंजेक्शन का प्रयोग फेल होने के बाद ऑपरेशन किल शुरू होता है। जंगल में अन्य जानवर होने के कारण इसमें खतरा भी होता है। उन्होंने बताया कि उनका अगला ऑपरेशन उत्तराखंड के पौढ़ी में हो सकता है, जहां एक आदमखोर गुलदार ने 15 साल के बच्चे का शिकार किया है।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/