संतोष की मौत के मामले में हुई थी फजीहत
शुक्रवार को चर्चा फैल गई नरेश का शव ढाई माह तक मेडिकल कॉलेज में रखा रहा। इससे हड़कंप मच गया। आनन-फानन में कोविड ब्लाक में जिन मरीजों की मृत्यु हुई, उनका रजिस्टर खंगाला गया। दरअसल, संतोष कुमार के मामले में मेडिकल की काफी फजीहत हुई थी। उनका नाम, पता होने के बावजूद लावारिस में अंतिम संस्कार कर दिया गया था। बाद में इस मामले में कोविड ब्लाक प्रभारी समेत स्टाफ व कर्मचारियों पर गाज गिरी थी।
16 अप्रैल को भिजवा दिया था शव, आरोप निराधार: प्राचार्य
मेडिकल प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि नरेश की मृत्यु मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में 15 अप्रैल को सुबह सात बजकर 20 मिनट पर हुई थी। तीमारदारों को आईसीयू के डॉक्टर ने फोन पर संपर्क कर दे दी थी। तीमारदारों ने कहा था कि वह शव लेने आ रहे हैं, लेकिन उसके बाद तीमारदारों ने फोन बंद कर लिया और मेडिकल कॉलेज बॉडी लेने नहीं आए, न ही संपर्क किया। 16 अप्रैल को जब तीमारदार नहीं आए तो दोपहर बाद सीएमओ हापुड़ से संपर्क किया। सीएमओ ने 16 अप्रैल को रात 10 बजे एंबुलेंस भेज कर शव को हापुड़ मंगवा लिया। प्राचार्य ने कहा कि नरेश के तीमारदारों द्वारा 15 हजार रुपये मांगने के आरोप निराधार है।