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दर्द भरी दास्तां: लापरवाही की हदें पार, ढाई महीने बाद हुआ कोरोना मरीज का अंतिम संस्कार, मासूम ने दी मुखाग्नि

Sat, 03 Jul 2021 12:48 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेडिकल कॉलेज में फिर से एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। इस बार भी लापरवाही की सारी हदें पार कर दी गईं। बताया गया कि कोरोना संक्रमित का ढाई महीने बाद अंतिम संस्कार किया गया।
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अंतिम संस्कार किया गया। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कोरोना के कारण एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में जान गंवाने वाले नरेश का शव ढाई महीने तक हापुड़ की मोर्चरी में रखा रहा। अब उसका अंतिम संस्कार किया गया है। मृतक की पत्नी का आरोप है कि 15 हजार रुपये नहीं देने पर शव नहीं दिया गया था, इसलिए वह बिहार चली गई थी। महिला ने नीर फाउंडेशन और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से पति का हापुड़ में अंतिम संस्कार किया। डेढ़ साल के मासूम ने पिता को मुखाग्नि दी। 

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बस्ती जिले के नाथपुर निवासी नरेश हापुड़ की न्यू पन्नापुरी में परिवार के साथ रहता था। वह ठेला लगाकर गुजर कर रहा था। 13 अप्रैल को बीमार होने पर उसे मेरठ रेफर किया गया। नरेश की पत्नी गुड़िया ने बताया कि 15 अप्रैल को मेडिकल से उसके पति की मौत की सूचना आई। वह मेरठ पहुंचीं, लेकिन आरोप है कि अस्पताल कर्मचारियों ने 15 हजार रुपये मांगे। वह पैसों का इंतजाम करने के लिए लौट आई। इंतजाम नहीं हो सका तो उसने अस्पताल में फोन किया। आरोप है कि अस्पतालकर्मी ने फोन पर जवाब दिया कि नरेश का अंतिम संस्कार करा दिया गया है। इसके बाद दो मासूम बच्चों और देवर के साथ वह बस्ती लौट गई। उधर, स्वास्थ्य विभाग ने शव को हापुड़ की मोर्चरी में रखवा दिया। 

स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस के माध्यम से मोबाइल नंबर ट्रेस कर गुड़िया का पता लगाया। बस्ती पुलिस के सहयोग से गुड़िया दो मासूम बच्चों के साथ गुरुवार को हापुड़ पहुंची और पति के शव का अंतिम संस्कार कराया। हापुड़ की चिकित्साधिकारी डॉ. रेखा शर्मा का कहना है कि शव मोर्चरी में इसलिए रखवाया गया था, ताकि परिजनों के हाथों शव का अंतिम संस्कार हो सके। 

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संतोष की मौत के मामले में हुई थी फजीहत  
शुक्रवार को चर्चा फैल गई नरेश का शव ढाई माह तक मेडिकल कॉलेज में रखा रहा। इससे हड़कंप मच गया। आनन-फानन में कोविड ब्लाक में जिन मरीजों की मृत्यु हुई, उनका रजिस्टर खंगाला गया। दरअसल, संतोष कुमार के मामले में मेडिकल की काफी फजीहत हुई थी। उनका नाम, पता होने के बावजूद लावारिस में अंतिम संस्कार कर दिया गया था। बाद में इस मामले में कोविड ब्लाक प्रभारी समेत स्टाफ व कर्मचारियों पर गाज गिरी थी। 

16 अप्रैल को भिजवा दिया था शव, आरोप निराधार: प्राचार्य
मेडिकल प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि नरेश की मृत्यु मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में 15 अप्रैल को सुबह सात बजकर 20 मिनट पर हुई थी। तीमारदारों को आईसीयू के डॉक्टर ने फोन पर संपर्क कर दे दी थी। तीमारदारों ने कहा था कि वह शव लेने आ रहे हैं, लेकिन उसके बाद तीमारदारों ने फोन बंद कर लिया और मेडिकल कॉलेज बॉडी लेने नहीं आए, न ही संपर्क किया। 16 अप्रैल को जब तीमारदार नहीं आए तो दोपहर बाद सीएमओ हापुड़ से संपर्क किया। सीएमओ ने 16 अप्रैल को रात 10 बजे एंबुलेंस भेज कर शव को हापुड़ मंगवा लिया। प्राचार्य ने कहा कि नरेश के तीमारदारों द्वारा 15 हजार रुपये मांगने के आरोप निराधार है।
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