अपराधी या फिर किसी मुकदमे का नामजद आरोपी हो, उसे पकड़कर जेल भेजना पुलिस के सामने चुनौती बना हुआ है। मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने से पहले आरोपी का कोरोना टेस्ट अनिवार्य हो गया है। पुलिस आरोपी को मेडिकल के लिए जिला या मेडिकल अस्पताल में लाती है। आरोपी कोरोना संक्रमित है, इतना सुनते ही पुलिसकर्मी दूर हट जाते हैं। कई बार तो पुलिस आरोपी को अस्पताल में ही छोड़कर चली गई। ऐसे कई मामले जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में देखने को मिले हैं। पुलिस भी अपराधी और नामजद आरोपियों को पकड़ने से दूरी बना रही है, ताकि खुद को सुरक्षित रखा जा सके। अब पुलिस की दबिशें भी कम हैं।
चार दिन में पांच ऐसे मामले आए
आरोपियों के संक्रमित मिलने के बाद उन्हें अस्पताल में छोड़ने के पांच मामले चार दिन में ही सामने आ चुके हैं। इंचौली थाना क्षेत्र के साधारणपुर गांव में जहरीली शराब से 10 लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने दो प्रधान प्रत्याशी समेत पांच लोग पकड़ लिए थे। इनमें दो को जेल भेजा था। बाकी तीन आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसमें तीनों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ गई है। पुलिस को यह पता चलते ही पुलिस टीम उन्हें अस्पताल में ही छोड़ गई। बाद में अस्पातल वालों ने ही उनको भर्ती कराया।
वहीं, मुंडाली थाना क्षेत्र के जिसोरा गांव में झगड़ा हो गया था। इसमें दो आरोपियों को पुलिस ने पकड़ा। बाद में जांच में वह भी पॉजिटिव निकले। यह सुनकर पुलिस वाले उनको अस्पताल में ही छोड़ गए। इसके अलावा भी जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में रोजाना पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपियों का कोरोना टेस्ट कराया जाता है। आरोपियों की पॉजिटिव रिपोर्ट का पता लगते ही पुलिसकर्मी उनको छोड़कर भाग जाते हैं। चार दिन में पांच ऐसे केस मेडिकल व जिला अस्पताल में आए हैं। ऐसे संक्रमित आरोपियों से पुलिस बचती है।