डीपी पेट्रो केम गोदाम पर छापे के दौरान टीम ने फोन करके धनेंद्र जैन और विशाल जैन को बुलाया, लेकिन उन्होंने बाहर होने की बात कहकर आने से इंकार कर दिया। इसके कुछ देर बाद धनेंद्र का भांजा विक्की पहुंचा। विक्की ने बताया कि डीपी पेट्रो केम करीब दो-तीन साल से बंद है। लेकिन छापेमारी के दौरान टैंकरों में काले तेल की सप्लाई होती मिली।
छापेमारी की सूचना पर पहुंचे विक्की से पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने जानकारी ली। विक्की ने बताया कि दो-तीन साल से यह गोदाम बंद था। यहां से कोई तेल नहीं जाता। जिला आपूर्ति विभाग ने डीपी पेट्रो केम के कागज दिखाने की बात कही, लेकिन मौके पर कोई कागज नहीं दिखा पाए।
वहीं पुलिस प्रशासन का दावा है कि गोदाम के अंदर एक टैंकर मिला, जिसमें मशीन के जरिये जमीन में दबे टैंक से तेल भरा जा रहा था। करीब छह हजार लीटर काला तेल टैंकर में मिला। टीम ने जमीन में दबे चारों टैंक की जांच की। एक टैंक खाली था। बाकी में काले तेल के साथ ही एक अलग तरह का तेल भरा था।
टैंक में मिला काला तेल
जिला आपूर्ति विभाग के मुताबिक, एक टैंक में 33 हजार लीटर, दूसरे में 32 हजार और तीसरे में 7500 लीटर काला तेल मिला है। इस तेल को एलडीओ कहते हैं। विक्की ने बताया कि यह तेल फैक्टरियों में ईंधन के रूप में काम आता है।
तेल के काले कारोबार में चर्चित नाम है धनेंद्र जैन
तेल के काले कारोबार में धनेंद्र जैन सबसे चर्चित नाम है। मूल रूप से बड़ौत निवासी धनेंद्र जैन सबसे पहले 80 के दशक में एक भाजपा नेता की हत्या के मामले में चर्चित हुए थे। कभी खोखे में तेल का कारोबार करने वाले धनेंद्र आज करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। हालांकि अभी पुलिस धनेंद्र जैन के बेटे विशाल जैन के एक ही ठिकाने को निशाना बना पाई है। लेकिन सूत्रों की मानें तो उसका कारोबार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में फैला हुआ है।
धनेंद्र जैन के संबंध पुलिस विभाग के आला अधिकारियों से लेकर नेताओं तक रहे। इन्हीं संबंधों के दम पर वह न केवल अपने कारोबार को बढ़ाते रहे, बल्कि अपनी धमक भी समाज में बनाते रहे। 2012 में डकैती पड़ने के बाद धनेंद्र जैन ने एक आला पुलिस अधिकारी के दम पर बागपत और मेरठ प्रशासन से तीन सरकारी गनर अपनी सुरक्षा में ले लिये। कई पेट्रोल पंप का मालिक होने के साथ ही वह बिल्डर भी बन गए।
20 अगस्त को जब पुलिस ने दो केमिकल फैक्टरियों पर छापा मारकर नकली तेल के कारोबार का खुलासा किया, तो एक गोपनीय पत्र ने धनेंद्र जैन को भी पुलिस के निशाने पर ला दिया। आनन फानन में बागपत और मेरठ प्रशासन ने धनेंद्र जैन की सरकारी सुरक्षा वापस ले ली।
पुलिस के आला अधिकारी से रहे संबंध
धनेंद्र जैन की सबसे ज्यादा चर्चा एक सेवानिवृत्त प्रदेश स्तरीय पुलिस अधिकारी के साथ संबंधों को लेकर रही। मेरठ में ही कुछ समय पहले रहे एक आला अधिकारी को धनेंद्र जैन ने गाय भी भेंट की थी।
25 करोड़ के पुराने नोट वाली सूची में भी शामिल
राजकमल एन्क्लेव निवासी बिल्डर संजीव मित्तल के यहां बरामद हुए 25 करोड़ के पुराने नोट मामले की जांच चल रही है। इस जांच के दौरान जो 31 लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें धनेंद्र जैन का नाम भी शामिल है और उनके नाम के सामने एक करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि दर्ज है।