आदिशक्ति जगदंबे शक्तिपीठ गोल मंदिर
- फोटो : amar ujala
समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में शामिल कल्पवृक्ष को देवलोक का वृक्ष माना गया है। मनोवांछित फल देने वाले कल्पवृक्ष का पद्य पुराण में पारिजात के नाम से उल्लेख किया गया है। मेरठ शहर के जयदेवी नगर स्थित आदिशक्ति जगदंबे शक्तिपीठ गोल मंदिर में कल्पवृक्ष श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। चैत्र और शारदीय नवरात्र में श्रद्धालु मंदिर में देवी मां की परिक्रमा के साथ कल्पवृक्ष की परिक्रमा भी करते हैं।
पुजारी रामनारायण शर्मा ने बताया कि 1960 में मंदिर निर्माण कार्य आरंभ हुआ। मां जगदंबा की मनोहारी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा 1965 में अनंत विभूषित ब्रह्मलीन ज्योतिष पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य, कृष्णबोधाश्रम महाराज ने की थी। मां के दर्शन से भक्तों की पीड़ा दूर हो जाती हैं। कमल की खिलती हुई कली के रूप में बुर्ज बनाया गया है। यह आरोग्यता, लाभ का प्रतीक एवं सकारात्मक ऊर्जा का सूचक है।
20 वर्ष से कर रहे सेवा
देवी मंदिर में 20 साल से नियमित आकर सेवा कार्य कर रहे हैं। कठिन परिस्थिति में राह आसान हो गई। मंदिर में समय समय पर भंडारा और शोभायात्रा का भी आयोजन किया जाता है।
- मनोज अग्रवाल, सेवादार
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आस्था का केंद्र है मंदिर
मंदिर में आकर शांति मिलती है। यहां 12 साल से सेवा कार्य कर रहे हैं। देवी मां सबकी मुराद पूरा करती है। श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है। यहां मौजूद कल्पवृक्ष आस्था का केंद्र है।
- रोहित, श्रद्धालु
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