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आठ साल से हवा में लटक रहा ये पुल, बसपा-सपा और भाजपा, तीनों सरकारें आईं फिर भी नहीं उतरा जमीन पर

Wed, 02 Oct 2019 01:23 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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जुर्रानपुर फाटक पर लटका पुल - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ शहर की लाइफलाइन बन चुके बिजली बंबा बाईपास पर नौ साल से हवा में पुल लटका है। 24.71 करोड़ के बजट में रेलवे इस पुल पर 7.31 करोड़ खर्च कर चुका है, लेकिन निर्माण अधूरा है। 17.40 करोड़ सेतु निगम के खाते में थे, जिनका पता नहीं। पहले पुल और अब इनर रिंग रोड का पेंच फंसने पर लोगों को यहां रोजाना जाम से जूझना पड़ रहा है।

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जाम से निपटने के लिए शहर में इनर रिंग रोड का प्रस्ताव तैयार हुआ था। पिछले माह कमिश्नर अनीता सी. मेश्राम के निर्देश पर एमडीए ने इनर रिंग रोड का प्रस्ताव शासन को भेजा था। वहां से केंद्र सरकार को भेजकर एनएचएआई इस पर कार्य शुरू कर सकता था। कमिश्नर ने कहा था कि चारों तरफ हाईवे बना रही एनएचएआई ही इस इनर रिंग रोड को बना सकती है।

- अब इनर रिंग रोड से जुड़ेगा पुल
इस पुल को जोड़ने का कार्य इनर रिंग रोड ही करेगी। यह रिंग रोड गढ़ रोड-हापुड़ रोड-दिल्ली रोड-हरिद्वार रोड को जोड़ेगा। इनर रिंग रोड 34.28 किमी. लंबी व 45 मीटर चौड़ी होगी। इसके पहले चरण की शुरुआत गढ़ रोड से जाग्रति विहार एक्सटेंशन से होकर मेरठ-बुलंदशहर एनएच-235 को जोड़ती हुई बिजली बंबा बाईपास से होती हुई दिल्ली रोड को कवर करती हुई एनएच-58 को जोड़ेगी। 
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- 24.71 करोड़ का बजट पास हुआ था रेलवे पुल के लिए
- 17.40 करोड़ थे सेतु निगम के खाते में, इसका कोई हिसाब नहीं

यह भी पढ़ें: यूपी गेट से डासना के बीच दो पुलों के लिए रेलवे और सिंचाई विभाग ने दी एनओसी

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साल  2011 में बना था प्लान
मेरठ-हापुड़ रेल सेक्शन के फाटक नंबर-52 पर लटका पुल नौ वर्षों से इंतजार में हैं। लेकिन इसके दोनों ओर किसानों के विरोध के चलते एमडीए आगे की प्लानिंग करने में विफल हो गया था। 2011 में प्रदेश में बसपा की सरकार थी।

एक दिन में 50 हजार वाहन 
पिछले वर्ष पीडब्लूडी ने दिन-रात बिजली बंबा बाईपास की चौड़ाई बढ़ाने के लिए वाहनों की गिनती की थी। सामने आया कि सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक करीब 50 हजार वाहन इस बाईपास से गुजरते हैं। 

शासन को भेजा है प्रस्ताव
जब प्लान तैयार हुआ था, सरकार किसानों को जमीन का मुआवजा देने पर विचार नहीं कर सकी। अब इसके लिए इनर रिंग रोड का प्रस्ताव शासन को भेजा है। - दुर्गेश प्रसाद, मुख्य अभियंता

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