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मेरठ: घर में रखा था मां का शव, बाहर से बिना बताए कार उठाकर ले गई आरटीओ की टीम; अब कटवा रहे चक्कर

Fri, 25 Sep 2026 02:30 AM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

सदर रंजीतपुरी निवासी मनीष अग्रवाल और आशीष अग्रवाल की माता का निधन हो गया। अस्पताल से शव घर लाए ही थे कि एक घंटे बाद आरटीओ की टीम उनकी समय सीमा पूरी कर चुकी कार को उठाकर ले गई। इस अमानवीय कृत्य पर स्थानीय लोगों में रोष है। 
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आरटीओ मेरठ कार्यालय।
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विस्तार
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परिवहन विभाग के अधिकारियों ने शहर से लेकर देहात तक एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के खिलाफ जब्तीकरण की कार्रवाई शुरू की है। वाहनों में रखे रुपये और अन्य सामान को भी जब्त किया जा रहा है। टंकी में भरा डीजल व पेट्रोल भी वापस नहीं किया जा रहा है। ना ही कार्रवाई के बारे में कार मालिकों को बताया जा रहा है। बिना कोई नोटिस या जानकारी वाहन उठाए जा रहे हैं। इस दौरान अधिकारियों पर मनमानी और संवेदनहीनता के भी आरोप लग रहे हैं।
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ऐसा ही मामला छावनी क्षेत्र की रंजीतपुरी निवासी मनीष अग्रवाल के परिवार के साथ हुआ है। मनीष और उनके भाई आशीष अग्रवाल के अनुसार 15 सितंबर की सुबह अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मां की मौत हो गई थी। वह घर में मां के शव के पास विलाप कर रहे थे। उसी समय परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम घर के बाहर खड़ी होंडा सिटी कार उठाकर ले गई। कार में कुछ रुपये और घर का सामान रखा हुआ था। कुछ देर बाद जब कार गायब मिली, तो तो उसकी सूचना डायल 112 को दी। पुलिस मौके पर भी पहुंची थी। पड़ताल के बाद पता चला कि कार को आरटीओ के अधिकारी ले गए हैं।
 

दूसरे ही दिन मां की उठावनी करने के बाद मनीष व आशीष संभागीय परिवहन कार्यालय में आरटीओ अनीता सिंह और एआरटीओ सुधांशु रंजन से मिले। गाड़ी छोड़ने के लिए एक पत्र भी दिया। लेकिन किसी भी अधिकारी ने उनकी एक नहीं सुनी है। आशीष अग्रवाल ने बताया कि न तो कार की कीमत दी जा रही है और न ही उसमें रखी धनराशि और सामान वापस किया जा रहा है। इनका कहना है कि विभाग के अधिकारियों ने कार को उठाते समय परिवार के किसी भी सदस्य को बताना भी जरूरी नहीं समझा। पूरी तरह अन्यायपूर्ण कार्रवाई की गई है।
 

ये बोले एआरटीओ
इस संबंध में एआरटीओ सुधांशु रंजन का कहना है कि आरोप निराधार हैं। गाड़ी जब्त करते समय परिवार के सदस्यों को पूरी गाड़ी दिखाई जाती है। गाड़ी में पैसे और सामान रखे होने की बात पूरी तरह गलत है। वह कई तरीके से गाड़ी छुड़वाने का दबाव बना चुके हैं। जिनके वाहनों की उम्र पूरी हो चुकी है, उनको सलाह है कि वह स्वयं ही अपने वाहन को स्क्रैप करा लें। इससे उन्हें बाजार मूल्य भी मिलेगा और नई गाड़ी खरीदने पर भी लाभ मिलेगा।
 

पुराने वाहनों की जब्ती पर बढ़ रहा लोगों का विरोध
एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर परिवहन विभाग पुराने वाहनों पर कार्रवाई कर रहा है। विभाग 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को जब्त कर रहा है। यह कार्रवाई अब विभाग के लिए ही परेशानी का सबब बनती जा रही है।

परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमें शहर और देहात में निर्धारित आयु सीमा पूरी कर चुके वाहनों की तलाश कर रही हैं। पहले ऐसे वाहनों को सड़क पर दौड़ते समय पकड़ा जाता था। अब लोकेशन पाकर घरों और सार्वजनिक स्थानों पर खड़े वाहनों को भी क्रेन से उठाया जा रहा है। ज्यादतर लोग इस कार्रवाई के विरोध में उतर आए हैं। कई वाहन स्वामियों ने अपने वाहनों को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में घरों के बाहर खड़ा किया था। उनका नियमित संचालन नहीं हो रहा था। वाहन स्वामियों का कहना है कि घर के बाहर खड़े वाहन को उठाने की कार्रवाई स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने वाहन के उपयोग में होने या न होने का ध्यान रखने की बात कही।
 

कार्रवाई के कानूनी आधार
एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन पर न्यायालय और एनजीटी ने रोक लगाई है। बीएस-3 सीरीज तक के सभी वाहनों को स्क्रेप करने के निर्देश दिए गए हैं। बीएस-4 सीरीज के वाहनों की जांच की जा रही है। एआरटीओ प्रवर्तन सुधांशु रंजन ने बताया कि गलती से जब्त वाहन को दस्तावेज देकर वापस लिया जा सकता है।
 
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प्रदूषण नियंत्रण और प्रक्रिया
पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने का मुख्य मकसद प्रदूषण कम करना है। प्रवर्तन टीमों के साथ प्राइवेट स्क्रेप सेंटर संचालक या कर्मचारी को रखने की अनुमति है। यह अनुमति शासन स्तर से एसओपी में लिखित में दी गई है। वाहन स्वामियों ने घर के अंदर या परिसर में खड़े वाहन को जब्त करने के आधार पर सवाल उठाए हैं।

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