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अमर उजाला की खास रिपोर्ट: मीट फैक्ट्रियों से बढ़ा मौत का ग्राफ, अब तक गईं 400 लोगों की जान

Wed, 30 Jan 2019 11:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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अल्लीपुर में फैक्टरियों के कारण बना गंदे पानी का तालाब - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ में मीट के कारोबार में पिछले सालों में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। जैसे-जैसे यह कारोबार बढ़ता गया, वैसे ही मीट फैक्ट्रियों के आसपास के गांवों में मौतों का ग्राफ भी बढ़ता गया। अमर उजाला की टीम ने ऐसे गांवों में जाकर देखा, तो भयावह सच्चाई सामने आई। लोगों की मौतें तो हो ही रही हैं, साथ ही वे बुरी तरह बीमार भी हो रहे हैं। मीट फैक्ट्रियों का पानी सीधे जमीन में बोरिंग किया जा रहा है। पिछले एक साल में ही करीब 400 मौतें हो चुकी हैं, जिनमें से कुछ का प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने संज्ञान लिया है। बाकी मौतें कागजों में नहीं, सिर्फ ग्रामीणों के जेहन में हैं।

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पिछले 20 सालों में हापुड़ रोड मीट कारोबार का बड़ा केंद्र बन गया है। पिछले 10 साल में तो यह कारोबार आसमान छूने लगा। खास तौर पर अलीपुर गांव व आसपास के पूरे क्षेत्र में आज मीट फैक्ट्रियों हैं, जिनमें से कई तो अवैध हैं। यहां से विदेशों तक मीट सप्लाई किया जाता है। वहीं मेरठ शहर से लेकर गांव फफूंडा व इससे आगे तक मीट कारोबारियों से जमीन खरीद रखी है।

पीने के पानी को बना दिया जहर
इन फैक्ट्रियों ने आसपास के गांवों के पेयजल को जहर बना दिया है। कई मीट फैक्ट्रियों में कटान के बाद दूषित पानी बोरिंग के जरिये सीधे जमीन में उतारा जा रहा है। जहां ईटीपी लगे हैं, वहां मॉनीटरिंग नहीं हो रही है। दूषित पानी को खेतों में भी डाला जात रहा है। इससे दूषित पानी के तालाब बन गए हैं। फैक्ट्री संचालकों ने आसपास के खेत खरीद लिए हैं या किराए पर ले लिए हैं, जिनमें पानी डाला जा रहा है।

फैल रही घातक बीमारी
हापुड़ रोड पर बसे गांवों के लोगों का कहना है कि 20 वर्ष पहले इस रोड पर कोई मीट फैक्ट्री नहीं थी। जैसे ही मीट फैक्ट्री लगीं, उसके एक-दो साल में ही करीब 25 गांवों में घातक बीमारियां फैल गईं। पिछले 10 साल में तो स्थिति बदतर हो गई है। कैंसर, पीलिया, हेपेटाइटिस बी, किडनी संबंधी बीमारियों ने लोगों को गिरफ्त में ले लिया। क्षेत्र में 80 प्रतिशत मौतों का कारण यह दूषित पानी ही है। आरोप है कि सरकारी मशीनरी मीट फैक्ट्री संचालकों के पक्ष में खड़ी है।

कारोबारियों को राजनीतिक संरक्षण
कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन फैक्टरियों में छापेमारी की, लेकिन कारोबारियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी। अब मेरठ शहर समेत हापुड़ रोड स्थित लोहियानगर, काजीपुर, घोसीपुर, नरहाड़ा, हाजीपुर, अल्लीपुर, चिंदौड़ी, फफूंडा, बिजौली, खरखौदा, छतरी, खड़खड़ी, कौल, बवनपुरा, अतराड़ा, पांची, कैली व धीरखेड़ा समेत सभी गांवों में गंभीर बीमारियों से ग्रामीणों की मौत हो रही हैं। इन सभी गांवों में हैंडपंपों का पानी 10 वर्ष पहले ही खराब हो चुुका है। कई गांवों में पानी के लिए टंकी लगी हैं, लेकिन कई गांवों के लोग हैंडपंपों का पानी पीने को मजबूर हैं।

एक वर्ष में मौत और बीमारी के आंकडे़
गांव का नाम                    आबादी                      मृतक                   बीमारों की संख्या 

जाहिदपुर                         10000                     25                                     20 
हाजीपुर                           1400                       15                                     12
नरहाड़ा                           8000                       20                                      18
अल्लीपुर                         10000                     80                                       30 
जलालपुर                         1000                       12                                       10
फफूंडा                             9000                       40                                      22
बिजौली                              10000                   30                                       26 
खरखौदा कस्बा                  25000                     50                                       22
छतरी                                 3000                     18                                     6
उलधन                              6000                       20                                      12
बहरानपुर                          2000                        40                                      5
खासपुर                              3000                       20                                      4 
कैली                             8000                       30                                      12
(ग्रामीणों ने अपने गांव के आंकड़े दिए और मरने वालों के नाम भी बताए)

वर्जन
करीब 10 साल पहले गांव में कोई बीमारी नहीं थी। लेकिन अब तो कई सालों से लगातार मौतें हो रही हैं। प्रशासन हमारे गांव की तरफ देखने को भी तैयार नहीं है। -  शाहिद खां, ग्राम  प्रधान हाजीपुर

मीट व्यापारी दूषित पानी की जमीन में बोरिंग कर रहे हैं। फैक्ट्री से निकलने वाला पानी ये लोग खुद क्यों नहीं पीते हैं। ये रोजगार नहीं, मौत बांट रहे हैं। - कुसुम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य

यदि मीट फैक्ट्रियों को जल्द ही इस क्षेत्र से नहीं हटाया गया, तो महामारी जैसी स्थिति आ जाएगी। तब इससे निपटना बड़ी चुनौती होगी। - देवेंद्र शर्मा, ग्राम प्रधान खासपुर

एक वर्ष में हमारे गांव के करीब 20 लोगों की मौत हो चुकी है। भूजल खराब हो गया है। अब गांव में टंकी का निर्माण कराया जा रहा है। - इकबाल खां, ग्राम प्रधान उलधन
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सो रही स्वास्थ्य विभाग की टीम
कस्बा सहित सभी गांवों के ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले दस वर्षों में गांव में ज्ञात और अज्ञात बीमारी से सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। लेकिन आज तक स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव आकर सुध नहीं ली है। वहीं स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि गांवों में जाकर रिपोर्ट बनाई है, लेकिन ग्रामीणों ने इससे इंकार किया।

वर्जन
पहले काली नदी के आसपास के गांवों का सर्वे कराया जाता था। अब मामले ने तूल पकड़ा है, तो मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी के आदेश पर गांव-गांव जाकर सर्वे किया गया है। खास तौर से ऐसे गांव जहां कैंसर जैसी घातक बीमारियों से मौत हुई हैं, वहां ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे सभी गांवों की रिपोर्ट बनाकर सीएमओ को भेजी जाएगी। - डॉ. आरके सिरोहा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी खरखौदा

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