करीब 10 करोड़ के फर्जी स्टांप लगाकर बैनामा होने का खुलासा होने पर सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। मुख्य आरोपी विशाल काफी समय से फरार चल रहा था। पुलिस ने उसके दो सहयोगियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।
स्टांप घोटाले के मास्टरमाइंड 25 हजार के इनामी विशाल वर्मा को बृहस्पतिवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने कोषागार और रजिस्ट्री विभाग अधिकारियों की कार्यशैली की पोल खोल दी। सरकार को राजस्व की हानि कराने में अधिकारियों की भूमिका होना बताया।
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997 रजिस्ट्री में करीब 10 करोड़ के फर्जी स्टांप लगाकर बैनामा होने का खुलासा सब रजिस्ट्रार बोबिल ने अगस्त 2023 को किया था। सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया। एडीएम वित्त कार्यालय व रजिस्ट्री विभाग द्वारा रजिस्ट्री कराने वालों को अर्थदंड के साथ रिकवरी का नोटिस भेजना शुरू कर दिया। इसे लेकर पीड़ित व्यापारियों ने हंगामा किया। डीएम-एसएसपी सहित अन्य अधिकारियों से पीड़ित व्यापारियों ने रिकवरी के नोटिस पर रोक लगाने की मांग की।
एक के बाद एक पांच मुकदमे हुए, जिसमें पुलिस ने विवेचना में मुख्य आरोपी विशाल वर्मा निवासी सम्राट कॉलोनी, सिविल लाइन का नाम शामिल किया गया। एसएसपी ने दो महीने पहले उस पर 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया। शासन के प्राक्कलन समिति ने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई असंतोष बताकर नाराजगी जताई थी।
पांच दिन पहले रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। फिर सिविल लाइन थाने में विशाल वर्मा व उसके कार्यालय में तैनात कर्मचारी राहुल वर्मा पुत्र राजू वर्मा निवासी रिठानी, राहुल वर्मा पुत्र महेश वर्मा निवासी प्रवेश विहार मेडिकल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। तीन दिन पहले विशाल के दोनों कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बृहस्पतिवार को पुलिस ने मुख्य आरोपी विशाल वर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया है और घंटों पूछताछ की।
पुलिस के मुताबिक आरोपी विशाल ने स्टांप घोटाले में कोषागार और रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों की भूमिका बताई है। देर रात तक पुलिस पूछताछ में जुटी थी। विशाल के मोबाइल की भी जांच की, जिसमें कई लोगों के घोटाले में शामिल होने का अंदेशा जताया है।