दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर बृहस्पतिवार रात करीब साढ़े नौ बजे काशी टोल प्लाजा के पास कार की चपेट में आकर तेंदुए की मौत हो गई। पुलिस और वन विभाग की टीम ने तेंदुए का शव कब्जे में लिया। शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराने के बाद वन विभाग उसकी अंत्येष्टि कराएगा। नेशनल टाइगर अथॉरिटी की टीम की देखरेख में पूरी प्रक्रिया होगी।
विज्ञापन
टोल कर्मियों ने बताया कि मेरठ से दिल्ली की ओर जा रही कार से तेंदुए की टक्कर हुई। तेंदुए को देखकर लोगों ने वाहन रोक लिए और वीडियो बनाने लगे। सूचना पर वन विभाग की ओर से रेंज ऑफिसर रिठानी मदन और मेरठ रेंज से रवि राणा मौके पर पहुंचे। उन्होंने तेंदुए की जांच पड़ताल की। तेंदुआ एक वयस्क नर है, जिसकी उम्र करीब 4-5 साल के बीच है। शव को वन विभाग की टीम की ओर से कब्जे में ले लिया गया है। डीएफओ राजेश कुमार ने तेंदुए की मौत पर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि नेशनल टाइगर अथॉरिटी की टीम को सूचना दे दी गई है। तेंदुए को किस जगह रखा गया है और अंत्येष्टि किस जगह होगी, ये जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
कुछ दिन पहले ही दिखा था तेंदुआ
कुछ दिन पहले ही काशी टोल प्लाजा के पास तेंदुआ दिखाई दिया था। अगले दिन परीक्षितगढ़ क्षेत्र में एक तेंदुए को वन विभाग की टीम की ओर से रेस्क्यू किया गया था, जिसे बाद में शिवालिक के जंगल में छोड़ दिया। तब सभी ने माना कि यह वही तेंदुआ होगा, जो काशी टोल पर देखा गया था।
रात में संभलकर निकलें, मेरठ के आसपास तेंदुओं का जमावड़ा
रात के समय लोग संभलकर निकलें, क्योंकि मेरठ के आसपास के क्षेत्र में तेंदुओं का जमावड़ा है। आए दिन कहीं न कहीं से इनके देखे जाने की बात सामने आती है। एक हजार से अधिक किलोमीटर क्षेत्र में फैले हस्तिनापुर वन्य जीव विहार क्षेत्र में मेरठ, हापुड़, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और अमरोहा क्षेत्र आता है। इस वन्य जीव विहार क्षेत्र का पर्यावरण और वातावरण तेंदुओं के लिए अनुकूल होता जा रहा है। पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या बढ़ी है।
गन्ने की फसल की कटाई और भोजन की तलाश में तेंदुए आबादी की तरफ आ रहे हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार यहां दस के आसपास तेंदुए हैं। बिजनौर व आसपास के क्षेत्र को और मिला दें तो इनकी संख्या 50 से भी अधिक है।
अपनी मर्जी से शहर की ओर नहीं आता तेंदुआ
वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ. आरके सिंह ने बताया कि तेंदुआ अपनी मर्जी से कभी शहर की ओर नहीं आता। जंगल में वयस्क तेंदुए या वृद्ध तेंदुए नए तेंदुओं को जंगल से बाहर करते हैं। वह बाहर आने के बाद अपने लिए गन्ने के खेत या अन्य स्थानों पर जगह बना लेते हैं। गन्ने के कटान के बाद वह बाहर निकलते हैं और कुत्तों, मुर्गी या भोजन की तलाश में शहर की ओर भटक कर पहुंच जाते हैं।
मेरठ में कब-कब आया तेंदुआ
13 फरवरी 2014- परीक्षितगढ़ में देखा गया तेंदुआ
23 फरवरी 2014- सदर बाजार
14 अप्रैल 2016 - कैंट क्षेत्र में घुसा तेंदुआ
23 नवंबर 2021- घायल तेंदुए को रेस्क्यू कर इटावा भिजवाया गया
3 मार्च 2022- पल्लवपुरम से रेस्क्यू किया गया तेंदुआ
2 अप्रैल 2022- किठौर से रेस्क्यू किया गया तेंदुए का बच्चा
3 दिसंबर 2022- टीपीनगर के ज्वाला नगर में देख गया तेंदुआ
14 जनवरी 2023 - जागृति विहार में देखा गया तेंदुआ
2024 के शुरू में ही कशेरुखेड़ा में रेस्क्यू किया गया तेंदुआ।