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कवि सम्मेलन एवं मुशायरा: भारत माता के जयकारों से गूंजा पूरा हॉल, कवियों ने हंसाते-हंसाते किया लोटपोट

Sat, 14 Aug 2021 11:05 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

कवि सम्मेलन से डेढ़ साल का सन्नाटा टूटा तो हर कोई जोश से लबरेज दिखा। सम्मेलन में जहां वीरों की गाथाओं का गुणगान हुआ। वहीं कवियों ने अपनी हास्य रचना से हर किसी को लोटपोट कर दिया।
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मेरठ में कवि सम्मेलन। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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ओज की ऐसी बयार बही कि हर कोई देशभक्ति के रंग में सराबोर हो गया। पूरे प्रेक्षागृह में भारत माता के जयकारे गूंजने लगे। मौका था चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में अमर उजाला के अभिनव अभियान मां तुझे प्रणाम के कवि सम्मेलन और मुशायरे का।

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जेपी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, जेपी रेजिडेंसी और केएल इंटरनेशनल स्कूल के सहयोग से अमर उजाला के अभिनव अभियान मां तुझे प्रणाम के तहत शुक्रवार को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सीसीएसयू के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में आयोजित सम्मेलन में ओज के वरिष्ठ कवि हरिओम पंवार ने देश भक्ति से सराबोर काव्य पाठ सुनाकर पूरे माहौल को देशभक्ति के रंग में डुबो दिया। इसके अलावा सुनील जोगी, सुदीप भोला, विनीत चौहान, मुमताज नसीम और सुमनेश सुमन ने भी श्रोताओं से खूब तालियां बटोरीं।

कवि सम्मेलन से डेढ़ साल का सन्नाटा टूटा तो हर कोई जोश से लबरेज दिखा। सम्मेलन में जहां वीरों की गाथाओं का गुणगान हुआ। कवियों ने अपनी हास्य रचना से हर किसी को लोटपोट कर दिया। मुख्य अतिथि कमिश्नर सुरेंद्र सिंह, आईजी प्रवीण कुमार, चौधरी चरण सिंह विवि के कुलपति प्रो. नरेंद्र कुमार तनेजा, सांसद राजेंद्र अग्रवाल, जिपं अध्यक्ष गौरव चौधरी, केएल इंटरनेशनल स्कूल से हरनीत खुराना ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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वीर रस कवि - विनीत चौहान
मां तुम्हारा लाडला रण में अभी घायल हुआ है
पर देख उसकी वीरता को शत्रु भी कायल हुआ है
रक्त की होली रचाए मैं प्रलंयकर दिख रहा हूं
मां उसी शोणित से तुमको पत्र अंतिम लिख रहा हूं
युद्ध था भीषण मगर ना इंच भी पीछे हटा हूं
मां तुम्हारी थी शपथ, मैं आज इंचों में कटा हूं

हास्य रस कवि - सुदीप भोला
नमो नमो के नारे खूब हुए जयकारे काशी वाले विश्वनाथ ने खोल दिए भंडारे सारे मोदी के विरोधियों में मेल हो गया, उसके बाद भी सौ रुपया लीटर तेल हो गया।
वर्दियां, वर्दियां, वर्दियां ये वर्दियां
सैनिकों की वर्दियां, सिपाहियों की वर्दियां
जो वतन के वास्ते खून से सनी रहीं
देश के लिए बनी रहीं, आन-बान-शान के लिए तनी रहीं
तन हुए थे खाक फिर भी खाकियां तनीं रहीं
सैनिकों की वर्दियां, सिपाहियों की वर्दियां

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वीर रस के कवि - डॉ. हरिओम पंवार
जो सीने पर गोली खाने आगे बढ़ जाते थे
आजादी के हवन कुंड के लिए जवानी दे डाली
उनके भी स्मारक भी चारों धाम दिखाई देते हैं
अमर तिरंगा उन बेटों की याद दिखाई देता है
उनकी यादों के पत्थर पर दो आंसू गिरा देना
जिन बेटों ने पर्वत काटे हैं अपने नाखूनों से
उस कुर्बानी के दीपक से सूरज भी शर्माता है

शायरा - मुमताज नसीम
चाहत में हर पल दिल का गुलशन खिलाना पड़ता है
मैं तो हूं मुमताज इतना बतलाए देती हूं
शाहजहां बनने के लिए ताजमहल बनाना पड़ता है
जन्नते वादी कश्मीर पर झगड़ा क्यूं है

हास्य रस कवि - सुनील जोगी
जन्म जनगणना के लिए हुआ है
अगर आपकी शादी नहीं हुई और प्रेमिका नहीं है। अगर कोई लड़की आपसे कह दे तो साउथ के हीरो जैसे लगते हैं तो आपको कलुआ बोल रही है।
कहां गए वो लोग... वो लोग
रुखा सूखा खाने वाले सबको राह बताने वाले
हर पौधे को जल देते थे....तंहाई में गाने वाले
कहां गए वो लोग...चिड़ियों को देते थे दाना

सुमनेश सुमन
धर्म से पूर्व जो देश हित में चढ़े
फूल क्या उस समूचे चमन को नमन
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