अल्कोहल और एसेंस से बनती है शराब
कुछ माफिया सरकारी शराब की दुकान पर बिकने वाली बोतलों को लेकर उसकी आधी शराब निकालकर दूसरी बोतल तैयार कर बेचते हैं। इसमें वह थोड़ी स्प्रिट और पानी के साथ एसेंस मिलाते हैं। वहीं कुछ माफिया अल्कोहल में पानी और एसेंस मिलाकर शराब तैयार करते हैं। इसके साथ ही खाने वाले रंग से शराब को रंग दिया जाता है।
रम के लिए लौंग का प्रयोग
सूत्रों के अनुसार, रम बनाने के लिए लौंग का प्रयोग होता है। लौंग को भूनकर, पीसकर पानी में उबाला जाता है।
लगा देते हैं मुहर
शराब के हर ब्रांड का लेबल प्रिंटिंग प्रेस पर छप जाता है। इसके पैकिंग बॉक्स भी तैयार कराये जाते हैं। कुछ लोग इसके ऊपर ‘ओनली सेल फोर हरियाणा’ या ‘ओनली सेल फॉर डिफेंस’ की मुहर लगा देते हैं, जिससे इसके असली होने का आभास होता है।
जरा सी चूक से खतरा
इस शराब को तैयार करने में जो अल्कोहल प्रयोग होता है, उसकी मात्रा जरा सी ज्यादा होना पीने वाले के लिए हानिकारक बन जाता है। शराब माफिया कभी-कभी इथाइल की जगह मिथाइल का भी प्रयोग कर जाते हैं, जो जानलेवा होता है। अगले माह होली के साथ ही लोकसभा चुनाव का माहौल बनेगा। ऐसे में शराब की बिक्री पर जोर होगा। तैयारी में शराब माफिया जुटे हैं।
बहुत खतरनाक है
वरिष्ठ फिजीशियन डा. तनुराज सिरोही का कहना है कि अंग्रेजी शराब बनाने में इथाइल अल्कोहल का प्रयोग होता है। डिस्टलरी की लैब में टेस्टिंग के बाद मानक तय होता है और उसकी तीव्रता आदि कम की जाती है। नकली शराब का कोई पैमाना नहीं है।
सील करना नहीं आसान
हरियाणा की शराब यहां सस्ती होने के कारण तो बिकती है। लेकिन नकली अंग्रेजी शराब बनाने का यहां कोई काम चल रहा है, ऐसा जानकारी में नहीं है। खाली बोतल तो शराब बनाने वाली कंपनियां भी खरीदती हैं, इसलिए कबाड़ी इन्हें अपने पास रखते हैं। यह बात सही है कि बोतल की कार्क आसानी से निकाली जा सकती है और नकली शराब भी बन सकती है। लेकिन बोतल को सील करना आसान नहीं है। क्योंकि ढक्कन पर भी अब ब्रांड की मुहर होती है। फिर भी यदि कहीं ऐसा हो रहा है, तो गंभीरता से जांच कराई जाएगी।
- आलोक कुमार, जिला आबकारी अधिकारी
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