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इतिहास में मेरठ: विदेशी अखबारों की सुर्खियां बनी थी 10 मई 1857 की क्रांति   

Sun, 08 May 2022 11:27 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

मेरठ से शुरू हुई क्रांति विदेशी अखबारों में सुर्खिंया बनी थी। भारतीय सिपाही विद्रोह कर चुके थे। पैदल सेना के परेड ग्राउंड में फायरिंग शुरू हो गई। अंग्रेज अफसरों को निशाना बनाया गया। सवा छह बजे तक दोनों जेल तोड़ दी गईं। अगले दो घंटे में छावनी इलाका जल उठा।
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1857 की क्रांति - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मेरठ में घटित हुई10 मई की क्रांति की घटना सिर्फ भारत के लिए ही ऐतिहासिक नहीं थी, इसका असर विश्व पटल पर भी पड़ा था। मेरठ से शुरू हुई क्रांति विदेशी अखबारों में सुर्खिंया बनी थी।   

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वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. केडी शर्मा बताते हैं कि नौ मई 1857 का दिन ऐतिहासिक था। सैनिकों की बगावत के बाद बहादुर शाह जफर को हिंदुस्तान का बादशाह घोषित कर पहली बार हिंदुस्तान की आजादी का आगाज हुआ था। 

9 मई को परेड ग्राउंड में जब अश्वारोही सेना के 85 सैनिकों का कोर्ट मार्शल किया गया, तो तीसरी अश्व सेना के अलावा 20वीं पैदल सेना व 11वीं पैदल सेना के सिपाही भी वहां मौजूद थे। 10 मई को रविवार का दिन था।

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अंग्रेज अधिकारी गर्मी के कारण सुबह की बजाय शाम को चर्च गए। रविवार होने की वजह से अंग्रेज सिपाही छुट्टी पर थे। कुछ सदर बाजार में गए हुए थे। शाम करीब साढ़े पांच बजे सदर बाजार से क्रांति की ज्वाला धधक उठी। 

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50 से अधिक अंग्रेजी अफसर-सिपाही मारे गए
भारतीय सिपाही विद्रोह कर चुके थे। पैदल सेना के परेड ग्राउंड में फायरिंग शुरू हो गई। अंग्रेज अफसरों को निशाना बनाया गया। सवा छह बजे तक दोनों जेल तोड़ दी गईं। अगले दो घंटे में छावनी इलाका जल उठा। शाम साढ़े सात बजे के आसपास ये लोग रिठानी गांव के पास एकद्त्र हुए और दिल्ली कूच कर गए। 

अगले दिन सुबह ये नावों के बने पुल को पार कर यमुना किनारे लाल किला की प्राचीर तक पहुंच गए। रात के हमलों से संभलकर ब्रिटिश सैनिकों ने भी दिल्ली कूच किया, लेकिन तब तक क्रांति की ज्वाला धधक चुकी थी। केडी शर्मा बताते हैं कि क्रांतिकारियों के इस हमले में 50 से अधिक अंग्रेजी अफसर-सिपाही मारे गए। सदर, लालकुर्ती, रजबन आदि जगहों पर खून ही खून नजर आ रहा था।
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