अंग्रेज अधिकारी गर्मी के कारण सुबह की बजाय शाम को चर्च गए। रविवार होने की वजह से अंग्रेज सिपाही छुट्टी पर थे। कुछ सदर बाजार में गए हुए थे। शाम करीब साढ़े पांच बजे सदर बाजार से क्रांति की ज्वाला धधक उठी।
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50 से अधिक अंग्रेजी अफसर-सिपाही मारे गए
भारतीय सिपाही विद्रोह कर चुके थे। पैदल सेना के परेड ग्राउंड में फायरिंग शुरू हो गई। अंग्रेज अफसरों को निशाना बनाया गया। सवा छह बजे तक दोनों जेल तोड़ दी गईं। अगले दो घंटे में छावनी इलाका जल उठा। शाम साढ़े सात बजे के आसपास ये लोग रिठानी गांव के पास एकद्त्र हुए और दिल्ली कूच कर गए।
अगले दिन सुबह ये नावों के बने पुल को पार कर यमुना किनारे लाल किला की प्राचीर तक पहुंच गए। रात के हमलों से संभलकर ब्रिटिश सैनिकों ने भी दिल्ली कूच किया, लेकिन तब तक क्रांति की ज्वाला धधक चुकी थी। केडी शर्मा बताते हैं कि क्रांतिकारियों के इस हमले में 50 से अधिक अंग्रेजी अफसर-सिपाही मारे गए। सदर, लालकुर्ती, रजबन आदि जगहों पर खून ही खून नजर आ रहा था।