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Meerut: अवैध मिनी रिफाइनरी पकड़ी, 35 हजार लीटर मिलावटी डीजल मिला, छह गिरफ्तार, जमीन में दबे थे चार टैंकर

Wed, 23 Oct 2024 11:32 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

हिंदुस्तान पेट्रोलियम के डिपो से टैंकर डीजल लेकर पंप के लिए निकलते थे। गोदाम पर आकर कुछ डीजल चोरी कर बेच देते थे। टैंकर में लगा जीपीएस परिचालक को दे दिया जाता था। जो पैदल चलकर अपनी लोकेशन जाम में फंसे होने की बताता था।
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पकड़ी गई अवैध रिफाइनरी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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परतापुर थाना क्षेत्र के गेझा गांव में एक गोदाम में अवैध मिनी रिफाइनरी और मिलावटी डीजल के खेल का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। मौके से 35 हजार लीटर मिलावटी डीजल मिला है। ये रिफाइनरी डिपो के टैंकरों से डीजल चोरी कर चार साल से चलाई जा रही थी। पुलिस के साथ आपूर्ति और बाट-माप विभाग की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की और छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यहां से एनसीआर के विभिन्न शहरों में स्थित फैक्टरियों में मिलावटी डीजल बेचा जा रहा था।
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जमीन में दबे टैंकर। - फोटो : अमर उजाला
गेझा निवासी अनिल कुमार गुप्ता ने पिछले चार साल से गेझा गांव स्थित गोदाम ब्रह्मपुरी निवासी मनीष गुप्ता को किराए पर दिया हुआ था। एएसपी अंतरिक्ष जैन ने परतापुर पुलिस के साथ मिलकर बुधवार दोपहर गोदाम पर छापा मारा। पुलिस को देखकर गोदाम पर मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई। पुलिस ने मौके से 12 हजार लीटर मिलावटी डीजल और 23 हजार लीटर मिलावटी बायो डीजल समेत हाइड्रो कार्बन व केमिकल बरामद किया। 

गोदाम संचालक मनीष गुप्ता। - फोटो : अमर उजाला
गोदाम में चार टैंकर जमीन में दबा रखे थे। इनकी क्षमता तीन लाख लीटर डीजल रखने की है। टैंकरों से तेल निकालने के लिए कई मोटर पंप लगाए गए हैं। इस दौरान एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह, जॉइंट मजिस्ट्रेट कमल किशोर, एएसपी अंतरिक्ष जैन, आपूर्ति विभाग के एआरओ नीरज कुमार समेत बाट-माप विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। एसपी सिटी ने बताया कि 35 हजार लीटर मिलावटी डीजल के अलावा भी केमिकल मौके से बरामद हुआ है।

मौके पर जांच करती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
रोजाना 12-15 लाख रुपये का नकली डीजल होता था सप्लाई
पुलिस के अनुसार ब्रह्मपुरी निवासी मनीष गुप्ता मार्केट से सस्ते दामों पर बायो डीजल और केमिकल खरीदता था। इस सामग्री को असली डीजल में मिलाकर 75 रुपये लीटर के हिसाब से फैक्ट्रियों को बेचता था। रोजाना 12 से 15 लाख रुपये का मिलवाटी डीजल फैक्ट्रियों को बेचा जा रहा था। पूछने पर गोदाम के कर्मचारी केमिकल का काम करने की जानकारी देते थे। बताया कि रोजाना गोदाम में लगभग 12 टैंकर आते जाते थे।
 

पकड़े गए आरोपी। - फोटो : अमर उजाला
टैंकर का जीपीएस लेकर पैदल चलता था चालक
एसपी सिटी ने बताया कि पूठा स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम के डिपो से टैंकर डीजल लेकर पंप के लिए निकलते थे, यहां गोदाम पर आकर कुछ डीजल चोरी कर बेच देते थे। ऐसा करने के दौरान टैंकर में लगा जीपीएस परिचालक को दे दिया जाता था। जो पैदल चलकर अपनी लोकेशन जाम में फंसे होने की बताता था। बाद में इसी गोदाम में डीजल में मिलावट कर इसे एनसीआर की फैक्टरियों में छोटे टैंकरों से सप्लाई किया जाता था।

इस तरह हो रहा था मिलावट का खेल
पुलिस के अनुसार पहले असली डीजल को जमीन में दबे टैंकर में डाला जाता था। इसके बाद बायो डीजल और अन्य केमिकल इसमें मिला दिया जाता था। पूरी प्रक्रिया मोटर पंप से पाइप के द्वारा की जाती थी। बताया गया कि आसपास के कई गांवों के किसान भी कम पैसों के लालच में ट्रैक्टर और इंजनों के लिए यहीं से डीजल खरीदते थे।
 

स्थानीय पुलिस की भूमिका संदिग्ध
मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल के सामने से सिवालखास को जाने वाले मुख्य मार्ग पर कई वर्षों से गोदाम में मिलावटी डीजल बनाने का धंधा चल रहा था। ग्रामीणों के अनुसार रोजाना एक दर्जन से अधिक कैंटर गोदाम में आते जाते थे। सड़क किनारे चल रहे इस नकली डीजल बनाने के गोदाम की पुलिस को भनक तक नहीं थी। जबकि गोदाम चार वर्षों से चलना बताया जा रहा है। ऐसे में स्थानीय पुलिस की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। इसकी भी जांच की जा रही है।

पकडे़ गए आरोपी
मनीष गुप्ता व उसका भाई अवनीश गुप्ता, बेटे आशीष गुप्ता के अलावा चालक शिवांग शर्मा, मजदूर प्रकाश कुमार और ब्रजकिशोर को गिरफ्तार किया गया है।
 
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आपूर्ति विभाग और एचपीसीएल ने लिए सैंपल
जिला आपूर्ति अधिकारी विनय कुमार ने बताया कि मौके से मिलावटी डीजल के सैंपल लेकर जांच के लिए गाजियाबाद भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों ने भी सैंपल लिए हैं।
 
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