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मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट: 25 वर्ष में बढ़त बनाती रही BJP, विपक्ष फिसला, SP-RLD को जनता ने नहीं लगाया गले

Thu, 21 Mar 2024 01:20 PM IST
Dimple Sirohi राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ

सार

UP Lok Sabha Chunav 2024: लोकसभा चुनाव के इतिहास में मेरठ की क्रांतिधरा राजनीति की धुरी रही है। कई बड़े नेता यहां से चुनावी जनसंभाएं कर जनता को साधते रहे हैं।
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बीजेपी और रालोद - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अधिकतर राजनीतिज्ञ मेरठ की क्रांतिधरा से ही चुनावी जनसभा करके उप्र ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों को भी संदेश देते रहे हैं। चुनाव में कई लोकसभा सीटें यहीं से साधी जाती हैं। मेरठ लोकसभा सीट की जनता ने जहां काफी लंबे समय तक कांग्रेस को गले लगाए रखा, वहीं 1999 से 2019 के बीच तीन बार भाजपा, एक बार बसपा और एक बार कांग्रेस के प्रत्याशियों को संसद भेजने का काम किया। 

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केवल सपा-रालोद ही ऐसे दल हैं जिनको 25 साल में मेरठ की जनता ने लोकसभा चुनाव में एक बार भी गले नहीं लगाया है। हालांकि इस बार 2024 के चुनावों में सपा और कांग्रेस का इंडिया गठबंधन गुल खिलाने के दावे कर रहा है।
 

यह भी पढ़ें: BJP का नया दांव: इन दो सीट से नए चेहरों को मैदान में उतारने की योजना, मेरठ से अरुण गोविल की दावेदारी पक्की

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मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट में मेरठ शहर, मेरठ कैंट, मेरठ दक्षिण, किठौर, हापुड़ विधान सभा सीट के लगभग 1987311 मतदाता हैं। जो अपना सांसद चुनेंगे। 1999 से 2024 तक मतदाताओं की संख्या में 717857 इजाफा हुआ है। 2019 तक प्रत्येक पांच साल में लगभग दो लाख और 2019 से 2024 के बीच 169531 ही मतदाता बढ़े हैं। 

मतदाताओं की बढ़ती संख्या के साथ साथ भाजपा का ग्राफ लगातार बढ़ा है। 2009, 2014 और 2019 में लगातार बढ़ते भाजपा के वोट प्रतिशत ने तीन बार राजेन्द्र अग्रवाल को संसद भेजा। 2024 के चुनाव में श्रीराम मंदिर की लहर के चलते भाजपा के बड़े नेता वोट प्रतिशत के बढ़ने का दावा कर रहे हैं।
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बसपा भी मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर वोट प्रतिशत में भाजपा के निकट दौड़ती रही है। 2004 में बसपा को अकेले चुनाव लड़कर मेरठ लोकसभा सीट पर सबसे अधिक 36.2 प्रतिशत वोट मिले। जिनसे चुनकर शाहिद अखलाक संसद पहुंचे।

2019 में बसपा-सपा गठबंधन से चुनाव लड़े बसपा के हाजी याकूब को 48.05 प्रतिशत मत मिले, लेकिन जीत नहीं पाए। अकेले चुनाव लड़ना बसपा के लिए भले ही एक बार के बाद जीत का मार्ग न मिल पाया हो, लेकिन वोट प्रतिशत में अधिक गिरावट नहीं आयी। इस बार भी बसपा अकेले चुनाव मैदान में है। 
 
कांग्रेस की बात करें तो 1999 में 34.7 प्रतिशत मत पाकर मेरठ लोकसभा सीट से अवतार सिंह भड़ाना सांसद चुने गए थे। इसके बाद से इस सीट पर कांग्रेस का वोट प्रतिशत इतना गिरा कि 2.08 पर पहुंच गया, जबकि सपा का वोट प्रतिशत कांग्रेस से  काफी बेहतर रहा है। इस बार मेरठ-लोकसभा सीट पर सपा और कांग्रेस गठबंधन में सपा चुनाव मैदान में है।  
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