वर्ष 2009 में रोहटा फाटक पर ठेले वालों और ट्रैक्टर सवारों में मारपीट हो गई थी। सूचना पर पहुंची पुलिस पर भी हमला किया गया था। प्राइवेट संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले दंगाइयों को सजा सुनाई गई।
अपर जिला जज अभय प्रताप सिंह द्वितीय ने रोहटा फाटक दंगे से जुड़े तीन मुकदमों की एकसाथ सुनवाई करते हुए छह दोषियों को चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वर्ष 2009 में रोहटा गेट पर दो समुदायों के बीच भड़की सांप्रदायिक हिंसा में भीड़ ने पुलिस के कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया था। तब दोनों समुदायों के लोगों में पथराव और आगजनी पर काबू करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने के साथ ही कई थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाना पड़ा था।
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रईस उर्फ रहिसुद्दीन, जैनुल, रहमत, नदीम, साबिर और शाहिद को दंगा भड़काने के साथ आगजनी, तोड़फोड़ कर संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में दोषी पाते हुए चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही उन पर अर्थदंड भी लगाया गया।
सरकारी वकील बबिता वर्मा के मुताबिक मुकदमे के वादी थानाध्यक्ष ब्रह्मपुरी ने 17 जून 2009 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सड़क पर ट्रैक्टर खड़े करने को लेकर ठेले वालों और ट्रैक्टर सवारों में आपस में मारपीट हो गई। इसमें कुछ लोग घायल हुए थे, जिन्हें पीएल शर्मा जिला अस्पताल में उपचार के लिए भिजवाया गया था।
इस घटना की जानकारी मिलने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष ब्रह्मपुरी पुलिस बल के साथ घटनास्थल का मुआयना करने के बाद पर अस्पताल पहुंचे तो एक समुदाय विशेष के लोगों ने भीड़ इकट्ठा कर सांप्रदायिक नारे लगाते हुए आगजनी और पथराव शुरू कर दिया।
उस समय थाना प्रभारी ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों को समझाया, लेकिन आरोपियों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर दूसरे समुदाय के लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काने के लिए नारेबाजी शुरू कर दी। साथ ही भीड़ एकत्र की जाने लगी। मना करने पर आरोपियों ने सरकारी काम में बाधा पहुंचाते हुए पुलिसकर्मियों को जान से मारने की नीयत से पथराव शुरू कर दिया,जिसमें संपत्ति को भी नुकसान हुआ था।
इस मामले में सरकारी वकील ने अपने केस को साबित करते हुए न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ गवाह पेश किए। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनकर तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को सजा सुनाई।