सेंट्रल मार्केट की सूरत अब बदली हुई सी नजर आने लगी है। बाजार में कई व्यापारियों ने अपनी दुकानों के बाहर अतिक्रमण हटाने के साथ ही छज्जों को भी ध्वस्त कर दिया है। कई दुकानदारों ने अपने आवास में बनाई गई दुकानों को बंद करके शटर हटा लिए और उनमें दरवाजे लगाए जा रहे हैं। कुछ दुकानों को पूरी तरह से दीवार लगाकर बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं, अब कई दुकानों पर बिकाऊ के भी पोस्टर और बैनर लगा दिए गए हैं। दूसरी ओर व्यापारियों ने तीन थानों में प्रदर्शन कर आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
शहर का दिल कहे जाने वाले सेंट्रल मार्केट का नूर अब फीका पड़ रहा है। ऊंची इमारतों में तमाम नामी ब्रांड्स के शोरूम अनायास ही लोगों को आकर्षित करते थे। शाम के समय तो बाजार में भीड़ इस कदर हुआ करती थी कि दुपहिया वाहन से निकलना भी आसान नहीं था। अब सुप्रीम कोर्ट के ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद सूरत ए हाल बदलता जा रहा है। तमाम शोरूम के बोर्ड और लाइटें हटने लगी हैं।
कई दुकानदार घरों में बनी दुकानों के शटर हटाकर दरवाजे लगाने लगे हैं। कुछ दुकानों के बाहर लोगों ने बिकाऊ के बैनर पोस्टर भी लगा दिए हैं। इसके अलावा कुछ व्यापारी बाजार से शिफ्ट भी हो रहे हैं। इस मामले में व्यापारी जनप्रतिनिधियों के साथ मुख्य सचिव और राष्ट्रपति से भी राहत दिलाने की मांग कर रहे हैं।
अलग-अलग थानों में व्यापारियों ने दी तहरीर
सेंट्रल मार्केट मामले में सोमवार को थाना नौचंदी में 32 लोगों ने लोकेश खुराना के खिलाफ तहरीर दी। थाना मेडिकल में 20 और 15 लोगों ने सिविल लाइंस थाने में तहरीर दी। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने नई भवन निर्माण एवं विकास उपविधि के तहत मुख्यमंत्री और सुप्रीम कोर्ट में आपत्ति पत्र दाखिल किया। लोकेश खुराना ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 141 एवं 144 के अंतर्गत पत्र प्रेषित कर सेंट्रल मार्केट सहित आवास विकास परिषद के तहत सभी कॉलोनियों के उपयोग परिवर्तनीय अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नियमितीकरण के खिलाफ प्रत्यावेदन प्रस्तुत करते हुए आपत्ति व्यक्त की गई है। मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगले सप्ताह सुनवाई संभव है।
व्यापारियों को पुनर्स्थापित किया जाए
पूर्व पार्षद एवं व्यापारी नेता सतीश गर्ग ने बताया कि शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट सेक्टर दो एवं सेक्टर तीन क्षेत्र में निम्न आय वर्ग ईडब्लूएस तथा लघु आय वर्ग के आवासीय भवनों में छोटे दुकानदार परेशान हैं। उन्हें भय सता रहा है कि संचालित दुकानों के बंद कर दिए जाने एवं ध्वस्तीकरण के भय से कारोबार समाप्त हो जाएगा। उनकी मांग है कि संविधान के अनुच्छेद 19(1) जी के तहत विस्थापन एवं पुनर्वास किया जाना चाहिए।