भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट ने रिश्वतखोर महिला दरोगा अमृता यादव को सात साल की सजा सुनाई है। उस पर 75 हजार अर्थदंड भी लगाया है। अमृता कोतवाली थाने में तैनात थी। अपने ही थाने में 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ी गई थी। विभागीय जांच में भी वह दोषी मिली।
शिकायतकर्ता समीर निवासी मोदीनगर, गाजियाबाद ने जून 2017 में शिकायत की थी कि उसकी शादी मजहर पुत्री अनवर के साथ हुई थी। शादी के बाद नाराज होकर उसकी पत्नी मायके चली गई थी। पत्नी ने उसके खिलाफ कोतवाली थाने में कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे में धारा कम करने की एवज में कोतवाली थाने की महिला दरोगा अमृता सिंह ने उससे 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण की टीम ने वादी के साथ मिलकर अमृता यादव को रंगेहाथ पकड़ा था।
अभियोजक महेंद्र सिंह प्रजापति एवं संजीव गुप्ता ने बताया कि वादी रणवीर सिंह निरीक्षक उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान मेरठ ने कोतवाली मेरठ में आरोपी दरोगा अमृता यादव निवासी सहारनपुर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनकर सजा सुनाई।
अपने ही थाने में मुल्जिम बन गई थी अमृता
कोतवाली थाने में तैनात अमृता यादव अपने थाने में ही मुल्जिम बन गई थी। अमृता यादव के खिलाफ अधिकारियों ने शासन को रिपोर्ट भेजी थी। पकड़े जाने से पहले भी कई बार अमृता यादव की घूस मांगने की शिकायत पुलिस अधिकारियों के पास पहुंची थी।
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
दो हत्यारों को सुनाई उम्रकैद की सजा
न्यायालय अपर जिला जज कोर्ट मेरठ मोहम्मद बाबर खान ने हत्या के आरोप में कपिल पुत्र ब्रह्म सिंह एवं आसिफ पुत्र हाकिम निवासी थाना क्षेत्र रोहटा को दोषी माना है। दोनों को उम्रकैद और 29-29 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
वादी ओंकार सिंह भाटी एवं सरकारी अधिवक्ता वैभव कुमार सिंह ने बताया कि वादी कृष्ण पाल ने रोहटा थाने में सन 2016 में रिपोर्ट दर्ज कराई कि गांव के प्रदीप शर्मा एवं आकाश ने षड्यंत्र के तहत आरोपी कपिल एवं आसिफ को हत्या करने के लिए सुपारी दी थी। जब वादी अपने साले सरुण उर्फ सोनू के साथ खेत से वापस घर की तरफ आ रहा था तो दोनों आरोपियों ने जान से मारने की नीयत से फायरिंग की। वादी कृष्णपाल मौके से भाग गया और उसके साले सरुण उर्फ सोनू को गोली लग गई। अस्पताल में सरुण की मौत हो गई। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। न्यायालय ने सबूतों के आधार पर कपिल और आसिफ को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास से दंडित किया है।