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मेरठ: नलकूप मीटरों से की जा रही किसानों की घेराबंदी, मीटर रीडिंग से बिल वसूलने की आशंका

Thu, 05 Aug 2021 03:42 PM IST
Dimple Sirohi राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ

सार

नलकूपों पर मीटर लगने से किसान आशंकित हैं कि कोरोना काल और चुनावी साल होने के चलते भले ही सरकार किसानों से मीटर रीडिंग से बिल वसूली करने से बचे, लेकिन भविष्य में वसूली मीटर रीडिंग से ही की जाएगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने भले ही इस साल विद्युत दरों में बढ़ोतरी करने से मना कर दिया हो, लेकिन सरकार ने नलकूपों पर मीटर लगाने की प्रक्रिया शुरू कर किसानों की घेेराबंदी शुरू की है। भाकियू और रालोद ने सरकार के इस फैसले का विरोध जताते हुए सरकार को किसान विरोधी करार दिया है। पश्चिमांचल में अब तक करीब 10 हजार नलकूपों पर मीटर लगाए जा चुके हैं।

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प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों ने चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) और वर्ष 2020-21 की एनुअल परफोर्मेंस रिव्यू के साथ विद्युत परिवर्तन दर स्लैब याचिका विद्युत नियामक आयोग में दाखिल की थी।

आयोग ने अपने गैप और सरप्लस की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पिछले साल की ही दरों को चालू साल में भी जारी रखने के आदेश दिए हैं। आयोग ने किसानों के लिए भी नलकूप की विद्युत दरों को फिक्स दर 170 रुपये प्रति हॉर्स पावर रखा है।
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आयोग द्वारा नलकूपों पर लगाए जा रहे मीटर कार्य को चालू रखने को कहा गया है। इससे किसान आशंकित हैं कि कोरोना काल और चुनावी साल होने के चलते भले ही सरकार किसानों से मीटर रीडिंग से बिल वसूली करने से बचे, लेकिन भविष्य में वसूली मीटर रीडिंग से ही की जाएगी।

करीब एक हजार करोड़ रुपये का बनता है बिल
पीवीवीएनएल के अंतर्गत आने वाले 14 जनपदों में करीब साढ़े चार लाख नलकूप उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं से फिलहाल 170 रुपये प्रति हार्सपावर की फिक्स दर पर बिलिंग करवसूली हो रही है। नलकूप उपभोक्ताओं पर हर साल करीब एक हजार करोड़ रुपया बिल बनता है। विद्युत नियामक आयोग की तरफ से सरकार पर नलकूपों पर मीटर रीडिंग के जरिए बिलिंग कराने का दबाव है।

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