बैंड की विधि त्यागी ने कई क्विज के जरिए सभी को बांधे रखा। उन्होंने मंच पर प्रीत की लत मोहे ऐसी लागी, हो जाऊं मैं मतवारी .... की तान छेड़ी तो सभी मुग्ध हो गए। इसके बाद एक से बढ़कर एक मस्ती के तरानों ने सभी को झुमाए रखा। दिल है मेरा, दीवाना क्या ... ताल पे जब झूमे बदन ..., इट्स टाइम टू डिस्को ... पर महिला चिकित्सक भी स्टेज के सामने लगे डीजे पर आ गईं और पूरे उल्लास से डांस किया।
जॉली, मोहित शर्मा, मोहित दादा ने धुनों और हिमांशु ने गिटार से दिलकश प्रस्तुति दी। लखनऊ से आए ऐनेस्थीसिया के विशेषज्ञ चिकित्सक डा. संघर्ष रॉय ने धुरंधर फिल्म में अक्षय खन्ना की एंट्री वाले गीत पर शानदार डांस किया। उनके बाद तमाम चिकित्सक अक्षय खन्ना की तर्ज पर थिरकते रहे। ओसा के सचिव डा. पुष्पेंद्र राणा, डा. भावना तोमर, डा. गौरव चौधरी, डा. सिपिका, डा. चारू आदि का सहयोग रहा।
रैगिंग का मतलब था अनुशासन
लखनऊ से आईं चिकित्सक डा. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि रैगिंग महज नाम ही है, जबकि उस समय सीनियर अनुशासन सिखाया करते थे। किस तरह से व्यस्त शेड्यूल में संयम बनाए रखते हुए काम के प्रति समर्पित रहना है, यह सिखाया जाता था। तमाम चिकित्सकों ने अपने शिक्षकों को याद किया और संस्मरण सुनाए।