भाजपा नेताओं का दावा है कि वर्तमान में उनके पास बहुमत से ज्यादा सदस्यों का समर्थन है। भाजपा नेताओं की मानें तो वे सपा प्रत्याशी को छोड़कर बाकी उनके पास प्रस्तावक और अनुमोदक तक के लिए सदस्य नहीं छोड़ना चाहते हैं।
अखिलेश से मुलाकात के बाद भी नहीं आई सक्रियता
सपा की गुटबाजी की बात जब राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तक पहुंची तो पार्टी नेताओं को तलब किया गया। पहले प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम से स्थानीय सपा नेताओं की वार्ता हुई और उसके बाद अखिलेश यादव से मिले। तय हुआ कि सभी एकजुट होकर अपना प्रत्याशी चुनाव में उतारें और मजबूती से लड़ाएं। लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष के दरबार में भी हाथ तो मिले, लेकिन सपा नेताओं के मन नहीं मिल पाए। यूं भी कह सकते हैं कि अब बाजी काफी हद तक हाथ से निकल चुकी है।