विशेष बात यह रही कि यहां धर्म, समुदाय और जाति की कोई सीमा दिखाई नहीं दी। हिन्दू, मुसलमान, सिख और ईसाई सभी श्रद्धालु एक साथ श्रद्धा और सेवा में शामिल रहे—जो सरधना की परंपरा का सबसे सुंदर पहलू है।
सुबह फादर ने पवित्र मिस्सा बलिदान की प्रार्थना कराई और माता मरियम के जीवन से विनम्रता, धैर्य और त्याग की प्रेरणा लेने पर बल दिया। शाम के सत्र में फादर ने कहा कि जीवन की छोटी उलझनों में फंस जाने के बजाय ईश्वर को सर्वोच्च स्थान देना ही सच्चे सुख की ओर ले जाता है।
रात आठ बजे की प्रार्थना सभा में माता मरियम के स्वर्गारोहण का महत्व बताया गया-एक मां के रूप में उनका प्रेम और सुरक्षा आज भी श्रद्धालुओं को संबल देती है। पूरे दिन चर्च परिसर में भजन, माला विनती, मिस्सा बलिदान और परम प्रसाद का आयोजन किया गया।
फादर वलेरियन पिंटो ने बताया कि मुख्य महोत्सव रविवार को होगा, जिसमें झांसी धर्मप्रांत के अध्यक्ष विल्फ्रेड मोरस विशेष प्रार्थना कराएंगे।