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फौजी की बेटी का बड़ा कमाल: खोज निकाला एल्जाइमर का इलाज, ये 'एप' बनाकर सभी को चौंकाया

Fri, 30 Sep 2022 05:42 PM IST
कपिल kapil संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ

सार

मेरठ में फौजी की बेटी ने एक बड़ा कमाल किया है। छात्रा ने एल्जाइमर का इलाज खोज निकाला है। छात्रा ने ये एप बनाकर सभी को चौंका दिया।
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छात्रा डिंपल दिनकर पाटिल - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मेरठ में आर्मी पब्लिक स्कूल की छात्रा डिंपल दिनकर पाटिल ने एल्जाइमर यानि की भूलने की बीमारी का समाधान डिजिटल माध्यम से खोज निकाला है। डिंपल ने एल्जाइमर पर मोबाइल एप 'ब्रेनी' बनाकर हर किसी को चौंका दिया है। वह बताती हैं कि उन्होंने विशेषकर अपनी दादी को देखकर इसे बनाने का सोचा, जो कि एल्जाइमर से पीड़ित है। उन्होंने इस एप को यूनेस्को के सामने भी प्रदर्शित कर मेंबरशिप ली है। जल्द ही ये एप प्लेस्टोर पर भी उपलब्ध होगा, जिसके लिए उन्होंने एक प्रतिष्ठित कंपनी से पेटेंट के लिए आवेदन भी किया है।

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कौन हैं डिंपल
मूलरूप से महाराष्ट्र निवासी डिंपल दिनकर पाटिल कैंट स्थित आर्मी यूनिट में रहती हैं। पिता पाटिल दिनकर महादेव फौजी हैं एवं माता गृहिणी हैं। कैंट स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल में 10वीं की छात्रा डिंपल पिछले दो सालों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विषय में रुचि रखती हैं। जिसकी मदद से उन्होंने इस एप को डिजाइन किया है।

'उरी' फिल्म से हैं प्रेरित
डिंपल बताती हैं कि एक बार हम सारा परिवार 'उरी' फिल्म देखने गए। फिल्म में फौजी की मां एल्जाइमर से ग्रसित होती हैं। वे कहीं खो जाती हैं, जिन्हें लाइफ ट्रैकिंग एप से खोजा जाता है। ऐसा ही कुछ मैंने अपनी दादी के लिए करना चाहा और एप बनाने की सोची।
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कुछ प्रश्नों के जवाब देकर पहचान सकते हैं बीमारी
ब्रेनी एप में सेग टेस्क से हम केवल कुछ प्रश्नों के जवाब देकर एल्जाइमर के शुरुआती लक्षण पहचान सकते हैं। इसके लिए आपको कोई क्लीनिक या डॉक्टर के पास जाने की आवश्यकता नहीं है। एप पर अपनी ई-मेल आईडी, जन्म की तारीख, परिवार के सदस्य, स्वास्थ्य संबंधी आदि प्रश्नों का उत्तर देते ही आपको अवगत करा देगा कि आपके भीतर एल्जाइमर के लक्षण हैं या नहीं।

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गानों के शब्दों से आप याद रखें पहचान
एल्जाइमर से ग्रसित रोगियों को उनकी व्यक्तिगत जानकारी याद रखने के लिए वे अपना गाना बना सकते हैं। ब्रेनी एप में पर्सनलाइज्ड म्यूजिक कैरियोके में आप अपनी आम सूचना जैसे नाम, पता आदि को फिल कर गाने के शब्द बन जाएंगे, जिन्हें रोजाना सुनने से अपनी पहचान नहीं भूलेंगे।
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