मुफ्ती मोहम्मद रहमतुल्लाह ने धार्मिक और समकालीन शिक्षा की आवश्यकता और महत्व के बारे में कहा कि ज्ञान वह सार है, जो राष्ट्रों के विकास को संचालित करता है। शिक्षा से लापरवाह लोग दुनिया की ठोकरों में रहते हैं।
मुफ्ती ए आजम मेरठ मौलाना इश्तियाक उल कादरी ने मेहमानों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि मदारिसे इस्लामी में मानव जाति को न केवल एक सच्चा मुसलमान बनाया जाता है, बल्कि उसे एक आदर्श इंसान भी बनाया जाता है। अंत में दूर दराज से आए मशहूर शोअरा ए कराम ने अपने-अपने अशआर पेश किए।
मदरसे के प्रबंधक भय्या शेख गुलाम कुतुबुद्दीन साबरी, प्रधानाचार्य हाजी मौलाना शम्स कादरी, हमीदुल्लाह खां, रईस अहमद, मौलाना वासिफ रज़ा, मौलाना नौशाद आलम, गुलाम हुसैन, शहाबुद्दीन, कारी मो. इसरार, मो. मसूद, ताजदार अहमद खान मौजूद रहे।