पुलिस के अनुसार, हत्यारोपियों और पप्पू की जंगल में ट्यूबवेल बराबर-बराबर में हैं। पप्पू एक सितंबर को पावटी गांव में धर्मेंद्र से पैसे लेने के लिए साइकिल पर गया था। जंगल में अपनी ट्यूबवेल पर बैठे चंद्रपाल और इंद्रपाल को देखते ही पप्पू ने गाली देनी शुरू कर दी। उन्होंने पप्पू को पकड़ने का प्रयास किया तो वह साइकिल दौड़ाकर पावटी की ओर भाग निकला। पप्पू ने लोधीपुर स्थित शराब के ठेके से एक पव्वा खरीदा और धर्मेंद्र के यहां पीया।
उधर, गाली-गलौज के बाद इंद्रपाल ने बेटे सागर को खेत पर बुलाया और उससे दो पव्वे शराब के मंगवाकर पीये और पप्पू का इंतजार करने लगे। देर शाम तक पप्पू नहीं आया। करीब 10 बजे पप्पू को तीनों ने दबोच लिया और सिर में एक डंडा मारा। इसके बाद चाकू से पप्पू के सिर और पेट पर प्रहार किए, जिससे उसकी मौत हो गई। पहचान मिटाने के लिए हत्यारोपियों ने पप्पू के कपड़े उतारकर जला दिए और गड्डा खोदकर पप्पू को जमीन में दबा दिया। पुलिस ने हत्यारोपियों की निशानदेही से जले हुए पकड़े, हत्या में प्रयुक्त चाकू और डंडा बरामद कर लिया। उसकी साइकिल और मोबाइल अभी बरामद नहीं हुए हैं।
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15 दिन पूर्व शांति भंग में हुआ था पप्पू का चालान
पुलिस ने बताया कि 15 दिन पूर्व पप्पू त्यागी पहलवान ने गांव में ही झगड़े के बाद गड़रिया बिरादरी के एक व्यक्ति को दरांती मारकर घायल कर दिया था। इस मामले में पप्पू का शांति भंग में चालान किया गया था। पप्पू का अक्सर गांव में किसी न किसी से विवाद चलता रहता था। लोगों का कहना है कि झगड़े के बाद पप्पू उनके पीछे फावड़ा या दरांती लेकर भागता था, इस कारण लोग उससे कम ही वास्ता रखते थे।
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