खेल, ज्वेलरी और कैंची से बनती है मेरठ की पहचान
इन्फ्लुएंसर आशुतोष ने कहा कि मेरठ की पहचान खेल, ज्वेलरी, कैंची और स्पोर्ट्स हब के तौर परहै। इनसे जुड़े कंटेंट को सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जाता है और कई वीडियो तेजी से वायरल होते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए स्थानीय संस्कृति और शहर की खासियतों को कंटेंट के जरिए देश-दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है।
लाइव पेंटिंग को मिल रही पहचान
लाइव पेंटिंग आर्टिस्ट हर्षिता भारद्वाज के अनुसार लाइव पेंटिंग करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन उन्हें इसमें आनंद आता है। उन्होंने कहा कि मेरठ जैसे शहर में इस तरह के कंटेंट को पहचान मिलना सकारात्मक संकेत है। सोशल मीडिया स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध करा रहा है।
समस्याओं पर ध्यान दिलाना भी जरूरी
इंफ्लुएंसर सावन कनोजिया ने कहा कि क्रांतिधरा में कई ऐसे अनछुए पहलू हैं, जिन्हें विश्व पटल पर पहचान दिलाना भी जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया के जरिए शहर की समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाई जाती हैं और अधिकारी भी कई मामलों में उनका संज्ञान लेते हैं।
बेहतर करनी होगी मेरठ की छवि
कंटेंट क्रिएटर हर्षित ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और खासतौर पर मेरठ की सोशल मीडिया पर बनी नकारात्मक छवि को बदलने की जरूरत जाहिर की। उन्होंने कहा कि पश्चिमी यूपी और मेरठ को अक्सर दंगों, भाषा और व्यवहार को लेकर जो नकारात्मक धारणा बनी है।
सोशल मीडिया उसे बदलने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। छवि बेहतर होगी तो यहां के युवाओं को आगे बढ़ने और नए अवसर भी बढ़ेंगे। कार्यक्रम में लक्ष्य और दीपक समेत अन्य कंटेंट क्रिएटर्स ने भी इस विषय पर अपनी बात रखी।
फेक न्यूज रोकने में जिम्मेदारी निभाएं मीडिया हाउस और कंटेंट क्रिएटर्स
संवाद कार्यक्रम में फेक न्यूज और सोशल मीडिया पर तेजी से फैलती भ्रामक सूचनाओं पर भी चर्चा हुई। इन्फ्लुएंसर्स ने कहा कि अखबार में प्रकाशित खबरों को लेकर लोगों के बीच विश्वसनीयता बनी हुई है और पाठकों को प्रमाणित व भरोसेमंद खबरें मिलती हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर सूचनाएं तेजी से प्रसारित होती हैं, ऐसे में फेक न्यूज की पहचान करना कई बार मुश्किल हो जाता है।
ऐसे में कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया यूजर्स की जिम्मेदारी है कि किसी भी खबर या सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता और स्रोत की जांच करें। बिना पुष्टि के जानकारी साझा करने से फेक न्यूज तेजी से फैल सकती है। ऐसे में प्रमाणित और विश्वसनीय जानकारी को ही आगे बढ़ाकर फेक न्यूज के प्रसार को रोकने में योगदान दिया जा सकता है।
कार्यक्रम में युवाओं और मीडिया के बीच संवाद को मजबूत करने तथा शहर की समस्याओं और सकारात्मक पहल को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।