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Meerut: खर्राटों से बीमार हुआ 10 साल के बच्चे का दिल, मेडिकल कॉलेज में सफल ऑपरेशन

Sat, 17 Jan 2026 12:33 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ मेडिकल कॉलेज में 10 वर्षीय बच्चे के खर्राटों से दिल की गंभीर बीमारी का मामला सामने आया। समय पर सर्जरी से बची बच्चे की जान, डॉक्टरों ने दी चेतावनी।

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स्लीप एप्निया खर्राटे लेना - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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अक्सर खर्राटों को गहरी नींद या थकान का सामान्य लक्षण मान लिया जाता है, लेकिन यह आदत गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है। मेरठ मेडिकल कॉलेज में सामने आया मामला इस लापरवाही की खतरनाक सच्चाई को उजागर करता है, जहां एक 10 वर्षीय बच्चे के खर्राटे उसके दिल के लिए जानलेवा साबित होने लगे।

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सांस रुकने से बिगड़ी दिल की हालत
10 वर्षीय आहिल बीते 6 से 8 महीनों से सोते समय तेज खर्राटे ले रहा था। कई बार उसकी सांस अचानक रुक जाती थी और वह घबराकर नींद में उठ बैठता था। परिजनों ने उसे मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में भर्ती कराया। जांच में सामने आया कि बच्चे के दिल के वाल्व प्रभावित हो चुके हैं और उसे ट्राइकस्पिड रिगर्जिटेशन की गंभीर समस्या हो गई है। हालत इतनी नाजुक थी कि उसे बार-बार वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।

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टॉन्सिल और एडेनॉइड बने बड़ी वजह
जांच में यह भी पता चला कि बच्चे के टॉन्सिल और एडेनॉइड असामान्य रूप से बढ़े हुए थे, जिससे उसकी सांस की नली संकरी हो गई थी। ऑक्सीजन की कमी के कारण दिल पर लगातार दबाव पड़ रहा था।

विशेषज्ञों की टीम ने किया सफल ऑपरेशन
पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मनीष तोमर ने ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. निकुंज जैन से परामर्श किया। इसके बाद बच्चे की एडेनोटॉन्सिलेक्टॉमी सर्जरी की गई, जो पूरी तरह सफल रही। अब आहिल स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रहा है।
इस सफल उपचार में डॉ. मनीष तोमर की टीम, डॉ. निकुंज जैन, सीनियर रेजिडेंट डॉ. दीपंकर मलिक, डॉ. रूपम, डॉ. अर्पित तथा एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. योगेश मणिक और डॉ. प्रमोद चंद्र की अहम भूमिका रही। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने पूरी टीम को बधाई दी।
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डॉक्टरों की चेतावनी
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. निकुंज जैन ने बताया कि खर्राटे सांस की नली में रुकावट का संकेत हो सकते हैं। इससे फेफड़ों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक तक का कारण बन सकता है। उन्होंने अपील की कि बच्चों या बड़ों में लगातार खर्राटों की समस्या होने पर तुरंत नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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