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मेरठ: धोखाधड़ी के मामले में बैंक अधिकारियों समेत सात के खिलाफ मुकदमा

Sun, 23 Aug 2020 03:14 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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बैंक घोटाला
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मेरठ में धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में कोर्ट के आदेश पर बैंक ऑफ बड़ौदा के चार बैंक अधिकारियों समेत सात के खिलाफ मेडिकल थाने में मुकद्दमा दर्ज कराया है। 

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शास्त्रीनगर निवासी महेश चंद शर्मा ने 24 नवंबर 2018 को बैंक ऑफ बड़ौदा की ई-नीलामी में शास्त्रीनगर स्थित एच-92 संपत्ति की सर्वाधिक बोली लगाई। वहीं, 29 दिसंबर 2018 को 25 फीसदी राशि जमा कर दी। वह प्रक्रिया जानने बैंक पहुंचे। यहां बताया कि इस संपत्ति से जुड़ी अपील डीआरटी लखनऊ में विचाराधीन है। इसलिए डीआरटी ने सेल सर्टिफिकेट जारी करने पर रोक लगा दी है।

यह भी बताया कि इस संपत्ति पर ऋण लेने वाले सेटर्न एग्रो केमिकल के मालिक शिवम रस्तोगी को 31 मार्च 2019 तक का समय ऋण चुकाने के लिए दिया है। महेश चंद शर्मा का आरोप है कि उन्होंने बैंक अधिकारियों से रुपये वापस मांगे।
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इस पर उन्होंने नियमों का हवाला देकर इनकार कर दिया। वहीं, चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय तक नीलामी संपत्ति का संपूर्ण जमा नहीं किया तो 25 फीसदी जमा धनराशि जब्त कर ली जाएगी। इस पर उन्होंने 25 मार्च, 2019 को बैंक ऑफ बड़ौदा और कुछ रिश्तेदारों से कर्ज लेकर रकम चुका दी।

इसके बाद भी बैंक अफसर उन्हें घुमाते रहे। इस पर उन्होंने डीआरटी लखनऊ में संपर्क किया। पता चला कि 31 मार्च 2019 के आदेश में कहा कि यदि शिवम रस्तोगी 15 जून 2019 तक ऋण नहीं चुकाते हैं तो कब्जा महेश चंद शर्मा को दे दें। मामला खुलता देख 17 जून, 2019 को बैंक ने उन्हें सेल सर्टिफिकेट दे दिया। उन्होंने कब्जे के लिए संपर्क किया तो बैंक अफसरों ने आश्वासन देकर लौटा दिया।

इसके बाद 12 अगस्त का समय दिया। उन्हें पता चला कि शिवम रस्तोगी ने संपत्ति पर कब्जा कर लिया है। वह एक करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं परंतु बैंक अधिकारियों ने संपत्ति पर कब्जा नहीं दिलाया।

थानाध्यक्ष मेडिकल कुलबीर सिंह ने बताया कि महेश चंद शर्मा की तहरीर पर बैंक अधिकारी राकेश मणिक, बृजेश पाठक, दर्शन कुमार, अरुण भार्गव समेत शिवम रस्तोगी, प्रभात रस्तोगी एवं चित्रा रस्तोगी के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का मुकदमा दर्ज किया है। सीओ सिविल लाइंस संजीव देशवाल ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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