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मेरठ का सौरभ हत्याकांड: जिला जज की अदालत ने मुस्कान-साहिल को दोषी माना, सजा पर फैसला रखा सुरक्षित

Wed, 30 Sep 2026 04:56 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया है। अदालत ने सजा के बिंदु पर फैसला सुरक्षित रखा है। मेरठ जिला अदालत ने सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या, साक्ष्य मिटाने और आपराधिक षड्यंत्र के मामले में दोषी ठहराया है।
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नीला ड्रम हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ के चर्चित सौरभ हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने बुधवार को सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया। अभियोजन के अनुसार, सौरभ की हत्या के बाद उसके शव के टुकड़ों को नीले ड्रम में रखकर सीमेंट के घोल से सील किया गया था। दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया और सजा के बिंदु पर फैसला सुरक्षित रखा है।

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सुरक्षा के बीच वीसी से हुई पेशी
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। बड़ी संख्या में वकील भी कोर्ट में मौजूद रहे। सुरक्षा कारणों के चलते जिला कारागार में बंद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया।

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लंदन से लौटने के बाद हत्या की साजिश का आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, इंद्रानगर निवासी सौरभ लंदन में नौकरी करता था और 24 फरवरी 2025 को मेरठ स्थित अपने घर लौटा था। अभियोजन का आरोप है कि सौरभ के वापस आने के बाद पत्नी मुस्कान और साहिल के बीच संबंधों में वह बाधा बन रहा था। इसी के चलते दोनों ने उसकी हत्या की साजिश रची।

अभियोजन के मुताबिक, 3 मार्च 2025 की रात सौरभ के खाने में नशीली दवा मिलाई गई। उसके बेसुध होने के बाद साहिल को घर बुलाया गया। इसके बाद दोनों ने धारदार हथियारों से हमला कर सौरभ की हत्या कर दी।

नीले ड्रम में सीमेंट से शव सील करने का आरोप
पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने और साक्ष्य मिटाने के लिए उसके टुकड़े किए गए। इसके बाद आरोपियों ने अनाज रखने वाला बड़ा नीला प्लास्टिक ड्रम, सीमेंट, बालू और डस्ट खरीदी।

अभियोजन के मुताबिक, शव के टुकड़ों को पॉलीथीन में लपेटकर ड्रम में रखा गया और उसके ऊपर सीमेंट का घोल डालकर उसे सील कर दिया गया। इसके बाद दोनों के शिमला-मनाली जाने की बात सामने आई थी।

परिस्थिति जन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर टिका अभियोजन
बचाव पक्ष की ओर से मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने और संपत्ति विवाद के कारण फंसाए जाने का तर्क दिया गया था। अभियोजन ने पुलिस विवेचना, चिकित्सकीय और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।

जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों ने अदालत के सामने मामले से संबंधित साक्ष्य पेश किए। चिकित्सकीय साक्ष्य में पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डॉ. दिनेश सिंह चौहान का बयान भी शामिल रहा। अभियोजन के अनुसार, सौरभ की मौत अत्यधिक रक्तस्राव और शॉक से हुई थी।

18 मार्च को दर्ज हुआ था मुकदमा
सौरभ के भाई की तहरीर पर 18 मार्च 2025 को मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, घर से नीले ड्रम में सीमेंट से जमा हुआ शव बरामद किया गया था।

घटनाक्रम की टाइमलाइन
24 फरवरी 2025: सौरभ लंदन से मेरठ अपने घर लौटा।
3 मार्च 2025: अभियोजन के अनुसार सौरभ की हत्या की गई।
4 मार्च 2025: शव को नीले ड्रम में सीमेंट से सील करने के बाद आरोपियों के शिमला-मनाली जाने की बात सामने आई।
18 मार्च 2025: सौरभ के भाई की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ।
19 मार्च 2025: पुलिस ने घर से सीमेंट में जमा शव बरामद किया और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
30 सितंबर 2026: जिला अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया और सजा पर फैसला सुरक्षित रखा।

22 गवाहों के बयान, करीब 125 तारीखें
सौरभ हत्याकांड में अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस भी पूरी हो चुकी थी। डीजीसी कृष्ण कुमार चौबे के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन जिला जज ने प्रतिदिन सुनवाई के आदेश दिए थे। मामले में करीब 125 तारीखें लगीं।

परिजनों ने की थी सख्त सजा की मांग
फैसले से पहले सौरभ के परिजनों ने आरोपियों को कड़ी सजा दिए जाने की मांग की थी। सौरभ के बड़े भाई राहुल ने कहा था कि परिवार आरोपियों के लिए फांसी से कम सजा नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि परिवार के लोग इस मामले को लेकर मानसिक रूप से परेशान रहे हैं।

सौरभ की मां रेनू देवी ने भी न्याय व्यवस्था और प्रशासन से न्याय की उम्मीद जताई थी। उन्होंने कहा था कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।
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आज फैसले के दिन शाम साढ़े चार बजे जज अरविंद मिश्रा के कोर्ट में पहुंचते ही जिला कारागार से साहिल और मुस्कान की कोर्ट में वीसी शुरू कराई गई।  जज ने कहा हाथ उठाओ मुस्कान रस्तोगी, आज फैसले का दिन आ गया है क्या लग रहा है । मुस्कान ने जवाब देते हुए कहा हमने जो करना था कर दिया।वहीं मुस्कान ने सवाल किए जाने पर कहा कि 'मुझे कुछ नहीं बोलना'। जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अपराध समाज में डर का माहौल बनाता है। 
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