केस नं. एक
हापुड़ अड्डा चौराहा से कुछ ही दूर नौचंदी शंभुदास गेट के सामने बनायी गई पुलिया अधूरी पड़ी है। यह स्थान सबसे अधिक भीड़भाड़ वाला है। पुलिया के खुले हिस्से में कब कौन गिरकर जान गंवा दें कुछ नहीं पता।
केस नं. दो
एल ब्लॉक तिराहा शास्त्रीनगर। यहां पर पुलिया बनायी गई है। तिराहा पर लाल बत्ती होने और चौराहों पर ई-रिक्शा का जमावड़ा होने के कारण वाहनों का अधिक दबाव रहता है। पुलिया के कुछ हिस्से को ढका जाने की बजाय खुला छोड़ दिया है।
केस नं. तीन
44वीं वाहनी के मुख्य गेट के पास कई माह पहले पुलिया बनायी गई। पुलिया का कार्य तो पूरा हो चुका है, लेकिन टूटे डिवाइडर के बीच लोहे के सरिया जनता को मौत की दावत दे रहे हैं। हाईवे पर मौत के गड्ढों को लेकर एनएचआई के अधिकारी और ठेकेदार गंभीर नहीं हैं।
ये बोली जनता
हाईवे पर आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। हापुड़ मार्ग पर अधिक वाहन हैं। कोहरे से पहले पुलियों को ढका जाना चाहिए। - मांगेराम गुर्जर,
- मार्ग पर काफी समय से नाले व पुलियों का निर्माण चल रहा है। पूरा होने का नाम ही नहीं ले रहा है। -शादाब, निवासी कोतवाली।
- एक साल से सुन रहे हैं सड़क चौड़ी होगी। अभी तक पुलियां का ही ठीक से निर्माण नहीं हो पाया है। -हाजी इमरान, ट्रांसपोर्टर।
- एल ब्लॉक तिराहा पर खुली पुलिया में कई बार लोग गिर चुके हैं। कोहरे में लोगों की जान को खतरा है। -अमान अहमद, जाकिर कालोनी।
इनका यह है कहना
अगर पुलिया खुली छोड़ी गई हैं, तो उनको ढकवाया जाएगा। संकेत चिंह भी लगवाए जाएंगे। पुलियों को खुला छोड़ना ठीक नहीं है। ठेकेदार को निर्देश जारी किए जाएंगे। - शैलेन्द्र सिंह, अधिशासी अभियंता, एनएचआई गाजियाबाद।