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अधिवक्ता आत्महत्या मामला: परिवार का बड़ा फैसला, अब नहीं होगी महापंचायत, तैयारी में जुटे थे ग्रामीण

Thu, 18 Feb 2021 12:44 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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पंचायत के लिए 10 बीघा का खेत तैयार किया था। - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के मेरठ में अधिवक्ता ओमकार सिंह तोमर की मौत के मामले में 19 फरवरी को होने वाली महापंचायत को स्थगित कर दिया गया है। मृतक अधिवक्ता के बेटे ने बताया कि अब हम किसी भी प्रकार की महापंचायत नहीं कर रहे हैं। घर में ही परिवार के लोग हवन पूजन कर साधारण तरीके से अंत्येष्टि करेंगे।

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19 की महापंचायत के लिए कराई थी 10 बीघा जमीन खाली 
अधिवक्ता ओमकार की आत्महत्या के मामले में ग्रामीण 19 फरवरी को उनके पैतृक गांव ग्राम ऐंची खुर्द में शोक सभा के साथ ही महापंचायत की तैयारी में जुट हुए थे। वहीं बुधवार को ग्रामीणों ने एक खेत में ट्रैक्टर चला कर करीब 10 बीघा भूमि खाली कर दी थी। ओमकार के बेटे लव ने बताया था कि तेरहवीं के दौरान गुर्जर समाज की महापंचायत का एलान भी होगा। 

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आत्महत्या के दस्तावेज भेजे 
अधिवक्ता के सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग मिलान की रिपोर्ट फॉरेंसिक लैब ने लौटा दी है। मामले में सुसाइड नोट की जांच बहुत महत्वपूर्ण है। पुलिस ने इससे संबंधित सभी दस्तावेज सील कर फॉरेंसिक लैब भेजे थे। फॉरेंसिक लैब ने कुछ आपत्तियां जताकर दस्तावेज लौटा दिए। गंगानगर पुलिस ने तीन घंटे में आपत्तियों को दुरुस्त करते हुए इन्हें दोबारा भेज दिया।
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वहीं अधिवक्ता ओमकार सिंह की मौत का मामला और अधिक पेचीदा होता जा रहा है। बुधवार देर रात इस मामले में नामजद दौराला थानाक्षेत्र के एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली। उसका शव घर के बाहर एक पेड़ से लटका मिला। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जांच पड़ताल कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

अधिवक्ताओं के दबाव में काम कर रही पुलिस
संजय के भाई ओमवीर ने आरोप लगाते हुए कहा पुलिस सत्ता और अधिवक्ताओं के दबाव में काम कर रही है। उसके भाई ने आत्महत्या नहीं की बल्कि गंगानगर के थाना प्रभारी ने मृतक ओमकार के बेटों के साथ मिलकर उसके भाई को मारा है। पुलिस यदि अधिवक्ताओं के दबाव में काम करेगी और निर्दोषों को जेल भेजने का काम करेगी तो वह हाईवे जाम कर देंगे। पुलिस ने उनकी 80 वर्षीय माता संतरा को भी हिरासत में ले रखा है। संजय की मौत की जानकारी के बाद भी पुलिस ने उनकी माता व अन्य परिजन को रात एक बजे तक भी नहीं छोड़ा। फोन पर एसपी सिटी से बात करने के दौरान मृतक के परिजनों ने कहा निर्दोष संजय मारा गया, जबकि मामले में संलिप्त आरोपियों पर पुलिस ने दबिश तक नहीं डाली है। जानकारी मिलने पर अनुज दादरी, दिमाग सिंह, ओमपाल गुर्जर, मनोज, अरविन्द मुखिया, राजेन्द्र प्रधान, सुरेन्द्र, तिलकरम आदि भी मौके पर पहुंचे और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

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