पहले मामले में 64 सिलिंडर की कालाबाजारी
जांच में सामने आया कि एक गैस एजेंसी द्वारा उपभोक्ताओं को सिलिंडर उपलब्ध कराने में अनियमितता की गई। हॉकर को पर्चियां तो दी गईं, लेकिन सिलिंडर नहीं दिए गए। साथ ही उपभोक्ताओं से अवैध रूप से होम डिलीवरी शुल्क भी वसूला गया। जांच में 64 सिलिंडरों की कालाबाजारी की पुष्टि हुई, जिसके बाद संबंधित एजेंसी संचालक और हॉकर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
दूसरे मामले में 48 सिलिंडर का हिसाब नहीं
दूसरे मामले में जांच टीम ने एक अन्य गैस एजेंसी का निरीक्षण किया, जहां स्टॉक में गड़बड़ी पाई गई। निरीक्षण के दौरान भरे और खाली सिलिंडरों की संख्या में अंतर मिला। 48 सिलिंडरों का हिसाब नहीं मिलने पर कालाबाजारी की पुष्टि हुई।
रिकॉर्ड नहीं दिखा सका प्रबंधन
जांच के दौरान एजेंसी प्रबंधन से सिलिंडरों की डिलीवरी का रिकॉर्ड मांगा गया, लेकिन वह उपलब्ध नहीं कराया जा सका। इसके आधार पर एजेंसी संचालक और मैनेजर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई
दोनों मामलों में संबंधित आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। विभाग का कहना है कि आगे भी इस तरह की अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।