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UP: मेरठ में 70 करोड़ की सफाई मशीन बनी कबाड़, अंडरग्राउंड डस्टबिन भी शोपीस

Thu, 10 Jul 2025 02:45 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

Meerut News: मेरठ नगर निगम की लापरवाही से करोड़ों की सफाई मशीनें और अंडरग्राउंड डस्टबिन खराब हो चुके हैं। MRF सेंटर और सुपर सकर मशीन भी अनुपयोगी साबित हो रही हैं।
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अंडरग्राउंड डस्टबिन के बाहर पड़ा कूड़ा। - फोटो : संवाद
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मेरठ में लापरवाही की हद हो गई है। यहां 70 करोड़ से अधिक की मशीन कबाड़ बना दी, सफाई व्यवस्था चौपट करके नगर निगम बेसुध है। 4.84 लाख की लागत से शहर में 11 जगह एमआरएफ सेंटर (कूड़ा छंटाई के लिए मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी), ट्रांसफर स्टेशन और अंडरग्राउंड डस्टबिन कचरा बन गई। शहर में गंदगी के ढेर लगे हैं। इसके बावजूद अधिकारी सुध लेने को तैयार नहीं हैं। 

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महानगर की सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। जेसीबी, ट्रैक्टर, ई-रिक्शा और कूड़ा वाहन खराब हो गए, जिनकी मरम्मत न होने पर वह जर्जर बन गए। 50 लाख की लागत से दो रोबोट भी खरीदे गए। इनको नाला या सीवर सफाई करते हुए किसी ने चलते हुए नहीं देखा। 1.75 करोड़ की सुपर सकर मशीन हो, सड़क पर गड्ढे भरने वाली एंबुलेंस या फिर अन्य मशीन की बात करें, तो उनकी हालत बहुत खस्ता है। 

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12 करोड़ की धनराशि से एमआरएफ, ट्रांसफर स्टेशन व अंडरग्राउंड डस्टबिन शहर में लगाए गए। अंडरग्राउंड डस्टबिन जिस संस्था ने लगाए थे, अब उन्होंने नगर निगम को हस्तांतरित कर दिए हैं। उसके बाद से अंडरग्राउंड डस्टबिन की जगह लोगों ने बाहर कूड़ा फेंकना शुरू कर दिया। कई जगह पर यह अंडरग्राउंड डस्टबिन सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं। 

अंडरग्राउंड डस्टबिन की हालत खराब
जागृति फाउंडेशन अजमेर संस्थापक अनिल त्रिपाठी ने बताया कि अंडरग्राउंड डस्टबिन लगाने की योजना तत्कालीन नगर आयुक्त अमितपाल शर्मा के कार्यकाल में लेकर आए थे। एक साल उनकी संस्था ने अपने कर्मचारी लगाकर डस्टबिन की देखरेख की, तब सफाई व्यवस्था बेहतर रही। जून 2025 में नगर निगम को डस्टबिन की देखरेख की जिम्मेदारी दे दी। 

सफाई पर पूरा फोकस है। लोहियानगर में 1200 मैट्रिक टन, गांवड़ी में गीला-सूखा कचरा निस्तारण करने के लिए 900 मैट्रिक टन का प्लांट लगाने की योजना बनी है। मंगतपुरम में 40 साल पुराना कचरा निस्तारण करने के लिए एक कंपनी काम कर रही है। जो मशीन खराब हैं, उनको ठीक कराया जाएगा। -सौरभ गंगवार, नगर आयुक्त
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