12 करोड़ की धनराशि से एमआरएफ, ट्रांसफर स्टेशन व अंडरग्राउंड डस्टबिन शहर में लगाए गए। अंडरग्राउंड डस्टबिन जिस संस्था ने लगाए थे, अब उन्होंने नगर निगम को हस्तांतरित कर दिए हैं। उसके बाद से अंडरग्राउंड डस्टबिन की जगह लोगों ने बाहर कूड़ा फेंकना शुरू कर दिया। कई जगह पर यह अंडरग्राउंड डस्टबिन सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं।
अंडरग्राउंड डस्टबिन की हालत खराब
जागृति फाउंडेशन अजमेर संस्थापक अनिल त्रिपाठी ने बताया कि अंडरग्राउंड डस्टबिन लगाने की योजना तत्कालीन नगर आयुक्त अमितपाल शर्मा के कार्यकाल में लेकर आए थे। एक साल उनकी संस्था ने अपने कर्मचारी लगाकर डस्टबिन की देखरेख की, तब सफाई व्यवस्था बेहतर रही। जून 2025 में नगर निगम को डस्टबिन की देखरेख की जिम्मेदारी दे दी।
सफाई पर पूरा फोकस है। लोहियानगर में 1200 मैट्रिक टन, गांवड़ी में गीला-सूखा कचरा निस्तारण करने के लिए 900 मैट्रिक टन का प्लांट लगाने की योजना बनी है। मंगतपुरम में 40 साल पुराना कचरा निस्तारण करने के लिए एक कंपनी काम कर रही है। जो मशीन खराब हैं, उनको ठीक कराया जाएगा। -सौरभ गंगवार, नगर आयुक्त