गुप्ता कॉलोनी में मौजूजद बंदरीनाथ में फंसे लोगों के परिजन।
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भगवान बद्रीनाथ के दर्शन करने गए मेरठ के श्रद्धालु फंस गए हैं। 150 से अधिक शहरवासी पंजाब सिंध धर्मशाला में कैद हैं। खाना तो दूर पानी तक के लाले पड़ गए हैं। खाने की चीजें तीन गुना अधिक कीमत पर मिल रही हैं। इस धर्मशाला में तीन हजार से अधिक लोग हैं। उत्तराखंड सरकारी की बेरुखी देखकर श्रद्धालु खुद ही सड़क बनाने में जुट गए हैं।
ट्रांसपोर्ट नगर की गुप्ता कॉलोनी निवासी अंकुर कुमार प्रजापति ने फोन पर बताया कि कि अपने साथी विजित शर्मा, विक्की शर्मा, राजकुमार शर्मा, कमल, अंकुश ढांका, योगेंद्र चाहर के साथ भगवान बद्रीनाथ के दर्शन करने आए थे। 27 जुलाई को बारिश के कारण लामबगड़ के निकट लगभग एक किमी सड़क पानी में बह गई। उसी दिन से लगभग तीन हजार श्रद्धालु फंसे हैं। मेरठ के 150 श्रद्धालु हैं। सरकार ने न तो उनके खाने की व्यवस्था की है और न सही प्रकार से रहने की। एक धर्मशाला खोली गई है, जिसमें भी लोग भूसे की तरह भरे हैं। लोगों ने विरोध किया तो उन्हें तीन दिन तक एक कमरे में बंद रखा।
पुलिस एक नहीं सुन रही है। अब दिन निकलते ही प्रतिदिन 250 से अधिक युवा पहाड़ी से पत्थर लाकर सड़क बनाने का काम कर रहे हैं। सरकार ने केवल सात लोगों को सड़क निर्माण में लगाया है। अब तो श्रद्धालुओं का जेब खर्च भी खत्म हो गया है। अंकुर कुमार ने बताया कि जेपी ग्रुप के कुछ लोगों ने बताया कि अगर सरकार अनुमति दे तो हनुमान चट्टी से एक सुरंग का रास्ता है, जिससे सभी को निकाला जा सकता है। उन्होंने बताया कि कई दिन में रविवार को परिवार के सदस्यों से बात हुई है।
आज डीएम से मिलेंगे परिवार
बद्रीनाथ मार्ग पर फंसे गुप्ता कॉलोनी के श्रद्धालुओं के परिवार वाले सोमवार को डीएम जगतराज से मिलकर सहायता की मांग करेंगे। अंकुर की पत्नी हेमा, माता शीला, पिता नरेंद्र और योगेंद्र की माता नेमवती पिता रूप सिंह, विजित के पिता ओमपाल शर्मा और विक्की शर्मा के पिता चंद्र किरण और माता मंजू का कहना है कि काफी प्रयास के बाद रविवार को ही बच्चों से संपर्क हो पाया है। वे डीएम से बात कर मदद की गुहार लगाएंगे।