चिकित्सा की पढ़ाई... बेटियां छाईं
मेडिकल कॉलेज का 57वां स्थापना दिवस मनाया, भावी चिकित्सकों को 36 गोल्ड मेडल, 178 प्रमाण पत्र, एक चल वैजयंती मिले
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में शनिवार को छात्र छात्राओं पर सोना बरसा। बेटियां बेटों से आगे रहीं। भावी चिकित्सकों को कुल 36 गोल्ड मेडल, 178 प्रमाण पत्र और एक चल वैजयंती प्रदान की गई। 121 विद्यार्थियों को एमबीबीएस और 42 को स्नातकोत्तर डिग्रियां दी गईं। मौका था लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के 57वें स्थापना दिवस पर आयोजित वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह का।
एमबीबीएस फाइनल प्रोफेशनल पार्ट दो में डॉ विदुषी अग्रवाल को 6 गोल्ड मेडल और 13 प्रमाण पत्र दिए गए। वह अपने बैच में परीक्षा में प्रथम स्थान पर रहीं। एमबीबीएस के सभी विषयों में सबसे अधिक अंक लाने के लिए उन्हें त्रिलोक जैन मेमोरियल गोल्ड मेडल और एसके गोयल मेमोरियल गोल्ड मेडल भी दिया गया। दिव्या सरीन और हिना रहमान को तीन-तीन गोल्ड मेडल मिले, जबकि कानन त्यागी और मधुर तोमर को दो दो गोल्ड मेडल मिले। राशि गर्ग और रुशने ज़हरा को एक एक गोल्ड मेडल मिला। डॉ. वर्णिक गोयल 5 प्रमाण पत्र के साथ द्वितीय स्थान पर रहे।
वहीं, स्नातकोत्तर में सर्वोत्तम प्रदर्शन करने वालों में डॉ आदित्य शर्मा, डॉ अनिरुद्ध गुप्ता, डॉ आनंद कुलकर्णी, डॉ दीपांशु माहेश्वरी, डॉ कृतिका अग्निहोत्री, डॉक्टर दीक्षा अग्रवाल, डॉ आकांक्षा आस्तिक, डॉ आशुतोष विश्नोई, डॉ गार्गी पांडे और डॉ कोमल सैनी को स्वर्ण पदक दिए गए।
इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत शोभायात्रा से की गई। छात्र-छात्राओं को शपथ दिलाई गई। मेडिकल छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। विशिष्ठ अतिथियों में सैफई चिकित्सा विश्व विद्यालय के प्रो. डॉ पीके सिंह, मंडलायुक्त सेल्वा कुमारी जे. और जिलाधिकारी दीपक मीणा रहे। अध्यक्षता चौधरी चरण सिंह विश्व विद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने की। कुलपति ने मंच से कहा भी कि बेटियां बेटों से आगे निकल रही हैं, बेटों को भी अब आगे बढ़ना चाहिए। कोरोना के कारण दो साल बाद यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। मेडिकल में पहली बार प्रधानाचार्य गोल्ड मेडल फ़ॉर स्टूडेंट ऑफ द ईयर पुरस्कार प्रारंभ किया गया, जो 2018 बैच के उत्कर्ष जायसवाल को मिला।
====
मेडिसिन ओपीडी, एजुकेशन यूनिट और इमरजेंसी विभाग का हुआ लोकार्पण
विशिष्ट अतिथियों ने हरित भोजनालय, जनरल मेडिसिन ओपीडी, मेडिकल एजुकेशन यूनिट और इमरजेंसी मेडिसिन विभाग का लोकार्पण किया। भोजनालय में पीएनजी शुरू की गई है। जनरल मेडिसिन ओपीडी की शुरुआत हुई ब, जिसमें कम गंभीर मरीजों को देखा जाएगा। मेडिकल एजुकेशन यूनिट में चिकित्सकों को नई-नई तकनीकों और चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे नए शोधों से अवगत कराया जाएगा जाएगा। इसके अलावा मेडिकल में डीएनबी कोर्स शुरू करने की कवायद है। इसके लिए 4 सीटों का आवेदन किया हुआ है। डीएनबी(डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड)तीन साल का पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स है। प्रमुख सचिव के न आने के कारण डीएनबी के लिए कॉलेज का निरीक्षण नहीं हो सका।
===
माता पिता का नाम करना चाहती हूं रोशन
सबसे ज्यादा गोल्ड मेडल जीतने वाली डॉ विदुषी अग्रवाल का कहना है कि वह अपने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती हैं। वह तीन बहनों में दूसरे नंबर की हैं। परिवार गाजियाबाद में रहता है। पिता डॉ पंकज अग्रवाल और माता डॉ प्रज्ञा अग्रवाल दोनों डॉक्टर हैं। वह 10-12 घंटे पढ़ाई करती हैं।
===
मेहनत से हासिल हो सकता है हर मुकाम
ओवरऑल बेस्ट कैंडिडेट इंटर्न 2017 चुनी गईं डॉ श्रेया का कहना है कि मेहनत से सब हासिल किया जा सकता है। पढ़ाई के साथ साथ उन्होंने कोविड के दौरान भी अस्पताल में सेवा की थी। वह जानसठ मुजफ्फरनगर की रहने वाली हैं। माता कुमुदनी और पिता एसके कृष्णा सरकारी टीचर हैं।
====
बच्चों के इलाज में करनी है महारत
डॉ शांतनु त्यागी मेरठ शास्त्रीनगर के हैं। पीडियाट्रिक्स में गोल्ड मेडल मिला है। बच्चों के इलाज में महारत हासिल करना चाहते हैं। इनके पिता प्रदीप त्यागीं नौकरी पेशा हैं जबकि माता प्रीति त्यागीं घरेलू महिला हैं।
====
पढ़ाई में बहुत अच्छा है मेडिकल कॉलेज
पीडियाट्रिक्स से एमडी कर रहे गोल्ड मेडल जीतने वाले डॉक्टर आनंद कुलकर्णी कर्नाटक के रहने वाले हैं। उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेज में बहुत अच्छी पढ़ाई होती है। सारी फैकल्टी अच्छी है और माहौल भी बहुत अच्छा है। उन्हें पढ़कर अच्छा लगा।
=====
हिंदी में प्रकाशित होने वाले दूसरे ई-जर्नल पुनर्नवा का विमोचन
स्थापना दिवस के दौरान पुनर्नवा नाम के मेडिकल साइंस के हिंदी में प्रकाशित दूसरे ई-जर्नल का विमोचन भी किया गया। पहला ई जर्नल पिछले साल अगस्त माह में प्रकाशित किया गया था।
====
यह रहे मौजूद
डॉ धीरज राज, डॉ गौरव गुप्ता, डॉ अंशु टंडन, डॉ. वीडी पांडे, डॉ. ज्ञानेश्वर टांक, डॉ. विजय जायसवाल, डॉ. अभिषेक राठौर और डॉ मेघा कुलश्रेष्ठ आदि।